Vodafone Idea आठ गुना तक महंगा करना चाहती है डेटा टैरिफ, अभी है 4-5 रुपए प्रति GB - .

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Sunday, 1 March 2020

Vodafone Idea आठ गुना तक महंगा करना चाहती है डेटा टैरिफ, अभी है 4-5 रुपए प्रति GB

Vodafone Idea आठ गुना तक महंगा करना चाहती है डेटा टैरिफ, अभी है 4-5 रुपए प्रति GB

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) भुगतान को लेकर कई बार कारोबार बंद करने की आशंका जता चुकी Vodafone Idea आपको बड़ा झटका देने की प्लानिंग कर रही हैं। कंपनी ने सरकार से डेटा टैरिफ के दाम बढ़ाने की गुहार लगाई है। कंपनी का कहना है कि दरें बढ़ाकर ही वह बकाया चुकाने और कारोबार को चलाए रखने में सक्षम हो पाएगी। Vodafone Idea ने डेटा टैरिफ में 7-8 गुना तक बढ़ोतरी की मांग की है। फिलहाल यूजर्स को यह डेटा 4-5 रुपए प्रति जीबी की दर से मिल रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी ने इसे सीधे दोगुना करने की मांग की है।
Vodafone Idea पर 50,000 करोड़ रुपए से ज्यादा एजीआर बकाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को जल्द से जल्द यह बकाया चुकाने का निर्देश दिया है। वोडाफोन आइडिया का कहना है कि वह बकाया चुकाने की स्थिति में नहीं है। ब्याज एवं पेनाल्टी पर तीन साल की छूट के साथ कंपनी बकाया चुकाने के लिए 18 साल का वक्त मांग रही है। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने कंपनी की अन्य मांगों के बारे में भी जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा, "वोडाफोन आइडिया ने कंपनी चलाते रहने के लिए सरकार से कई मांगें की हैं। कंपनी चाहती है कि डाटा की कीमत कम से कम 35 रुपए प्रति जीबी तय की जाए। कंपनी ने पहली अप्रैल से मंथली कनेक्शन चार्ज भी 50 रुपए करने की मांग की है। आउटगोइंग कॉल के मामले में कंपनी चाहती है कि कम से छह पैसा प्रति मिनट का टैरिफ तय किया जाए।" कंपनी का कहना है कि दरों में इस बढ़ोतरी के बाद वह राजस्व के उस स्तर पर पहुंच पाएगी, जो 2015-16 में वोडाफोन और आइडिया के अलग-अलग राजस्व का जोड़ था। कंपनी का यह भी कहना है कि उस स्तर को पाने में उसे तीन साल का वक्त लगेगा, इसलिए एजीआर बकाया चुकाने के लिए उसे तीन साल की छूट भी मिलनी चाहिए। इसके बाद 15 वर्षों में कंपनी बकाया चुका देगी।
वोडाफोन आइडिया ने यह पत्र दूरसंचार विभाग में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था डिजिटल कम्यूनिकेशंस कमीशन (डीसीसी) की बैठक से ठीक पहले भेजा है। डीसीसी कमजोर माली हालत का सामना कर रही वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को राहत देने पर विचार कर सकता है। कंपनी ने विभाग को लिखा है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) मद में सरकार के पास उसके करीब 8,000 करोड़ रुपए पड़े हुए हैं। अगर सरकार एजीआर बकाया मद में उसका समायोजन कर ले, तो कंपनी को बड़ी मदद मिलेगी। कंपनी ने लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (एसयूसी) में कमी की भी मांग की है।
दूरसंचार उद्योग के संगठन "सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया" (सीओएआई) ने सरकार से दूरसंचार कंपनियों पर एजीआर बकाए के भुगतान की शर्तें आसान करने को कहा है। सीओएआइ ने कहा कि संकट में फंसे क्षेत्र को उबारने के लिए जरूरी है कि सरकार एजीआर की देनदारी चुकाने के लिए दूरसंचार कंपनियों को कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराए।

सीओएआइ ने कहा, "बैंकों को इस बारे में स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि सरकार दूरसंचार क्षेत्र के साथ खड़ी है।" सीओएआइ के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश को लिखे पत्र में कहा, "बैंक अभी दूरसंचार क्षेत्र के साथ जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं। बैंक इस सेक्टर की कंपनियों को नई बैंक गारंटी जारी करने या बैंक गारंटी के नवीकरण से इन्कार कर रहे हैं। टेलीकॉम क्षेत्र से कहा जा रहा है कि वे अपना लोन घटाएं।"

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