ड्राइविंग से पहले पा लिया कमर्शियल पायलट का लाइसेंस - .

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Monday, 9 March 2020

ड्राइविंग से पहले पा लिया कमर्शियल पायलट का लाइसेंस

Women's Day 2020 : ड्राइविंग से पहले पा लिया कमर्शियल पायलट का लाइसेंस

मैं भारत की तीसरी महिला पायलट थी। 1984 से इंडियन एयरलाइंस ज्वाइन किया था। पुरुष प्रधान समाज में उस समय एक महिला का इस तरह से आगे आना बड़ी बात थी। मेरे साथी पायलट मुझसे कहते थे कि तुमसे नहीं हो पाएगा। जब तुम विमान लेकर पटना से रांची के लिए जाओगी तो भटक जाओगी। लेकिन मैंने उनकी बातों को अनसुना किया और अपनी नजर केवल आकाश पर रखी। 2012 में भारत का पहला ड्रीमलाइनर 787 विमान लेने अमेरिका गई थी। उसे उड़ा कर भारत लाते समय भी मैं जरा भी नर्वस नहीं हुई क्योंकि मैं उन लाखों महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही थी जिनका जीवन रसोईघर में बीत जाता है। यह कहना है विश्व का पहला 787 विमान चलाने वाली एयर इंडिया की वरिष्ठ महिला पायलट कैप्टन निवेदिता भसीन का।
शनिवार को इंदौर एयरपोर्ट पर आई निवेदिता ने नईदुनिया से विशेष चर्चा में कहा कि मैं स्कूल में खिड़की के पास बैठ आसमान देखती थी तो बड़ा रोमांचक लगता था। अल्फाबेट में भी मैं ए फॉर एप्पल के बजाए ए फॉर एयरोप्लेन बोलती थी। मै खुशकिस्मत रही कि इस लक्ष्य को पा लिया। मैं मात्र 23 साल की उम्र में पायलट बन गई थी। इसके बाद मैंने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। ऐसे ही मुझे पहले कॉकपिट मिला। किचन में मेरा प्रवेश बाद में हुआ। आज भारत में उड्डयन के क्षेत्र में 13 प्रतिशत महिलाएं हैं जो विश्व में सबसे अधिक हैं। मैं चाहती हूं यह प्रतिशत बढ़ कर 20 प्रतिशत हो जाए।

आ गई थी विमान में खराबी :- कैप्टन निवेदिता ने बताया कि करीब दो साल पहले मैं एक विमान को उड़ा रही थी, तभी अचानक एक इंजन में खराबी आ गई। हमने विमान में यात्रियों को सूचना नहीं दी। इसके बाद सीधे एटीसी को जानकारी दी। एटीसी से इमरजेंसी लैडिंग की अनुमति मिलने के बाद हमारा विमान लैंड हुआ, एंबुलेंस व दूसरे वाहनों ने विमान को घेर लिया। तब यात्रियों को पता चला कि विमान में कुछ खराबी आ गई थी।

सोचा था छोड़ दूं नौकरी : देश की सबसे युवा पायलट से 'दादी पायलट' बन चुकी निवेदिता कहती हैं कि मेरे पति और दोनों बच्चे भी पायलट हैं। अब मेरा पोता भी हो गया है। दो साल बाद मैं सेवानिवृत्त भी हो जाऊंगी। लेकिन नौकरी और बच्चों को संभालने के दौरान काफी मुश्किलें भी आईं। कभी बच्चों की पीटीएम मिस की तो कभी बीमार बच्चों को छोड़ कर जाना पड़ा। एक समय आया जब सोचा कि नौकरी छोड़ देती हूं लेकिन फिर सोचा- ऐसे काम नहीं चलेगा।

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