भोपाल में बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे से गरीबों की सेवा, रियायती दर पर शादी हॉल भी - .

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Monday, 11 November 2019

भोपाल में बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे से गरीबों की सेवा, रियायती दर पर शादी हॉल भी

भोपाल में बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे से गरीबों की सेवा, रियायती दर पर शादी हॉल भी

राजधानी के टीटी नगर में स्थित देश के दूसरे भगवान बद्रीनाथ के मंदिर का चढ़ावा गरीबों की सेवा में खर्च होता है। इसके अलावा ट्रस्ट का हॉल बीपीएल कार्डधारियों को शादी के लिए रियायती दर पर सिर्फ पांच हजार रुपए में दिया जाता है। वहीं, समाज के सामान्य परिवारों को सात हजार और गढ़वाल समाज के अलावा अन्य लोगों को आठ हजार रुपए में किराये पर दिया जाता है। उत्तराखंड से आए समाज के लोगों को मंदिर परिसर में बने कमरों में तब तक ठहराया जाता है, जब तक कि उस व्यक्ति को काम नहीं मिल जाता है। समाज के ही गरीब परिवारों में आकस्मिक दुर्घटना, बीमारी में भी एक लाख रुपए तक की आर्थिक मदद ट्रस्ट द्वारा की जाती है। 1988 में निर्मित मंदिर का संचालन गढ़वाली समाज ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। यह सेवा कार्य मंदिर की स्थापना के साथ से ही चल रहा है।
सहमति से चुने जाते हैं ट्रस्टी :- गढ़वाली समाज ट्रस्ट 1971 से संचालित है। तब से लेकर अब तक जितने भी अध्यक्ष बने हैं सभी समाज की सहमति से ही बने। नियुक्ति के दौरान कहीं कोई विरोधाभास जैसी स्थिति नहीं बनती। राजधानी में गढ़वाली समाज के 25 हजार से अधिक लोग उत्तराखंड के पोढ़ी गढ़वाल, टीहरी गढ़वाल, अलमोड़ा गढ़वाल, पिथोड़ागढ़ आदि क्षेत्रों के हैं। समाज में यही एकमात्र ट्रस्ट है।
10 फरवरी को होता है वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन :- 10 फरवरी 1997 को पुनरुद्धार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष बड़ा आयोजन होता है। इसमें राजधानी में रह रहे गढ़वाली समाज के सभी लोग शामिल होते हैं। इस वर्ष ट्रस्ट द्वारा भव्य पालकी यात्रा निकाली जाएगी। इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। लोगों को जिम्मेदारियां बांट दी गई हैं। मंदिर में बद्रीनाथ भगवान जी के साथ दरबार में लक्ष्मी जी, नर-नारायण जी, गणेश जी, कुबेर जी, उद्धव जी, नारद जी और गरुड़ जी विराजमान हैं। उल्लेखनीय है कि देशभर में बद्रीनाथ भगवान जी का उत्तराखंड के अलावा कहीं मंदिर नहीं है।

पूर्व राष्ट्रपति की माता ने की थी मूर्ति स्थापना :- ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय सिंह नेगी ने बताया कि मंदिर की स्थापना का रहस्य अद्भुत है। 18 सितंबर 1988 में ट्रस्ट के प्रयासों से उत्तराखंड के बद्रीनारायण मंदिर की प्रतिकृति स्वरूप में मंदिर का निर्माण किया। यह बात उस समय उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम पीठाधीश्वर को पता चली, तो उन्होंने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। विवाद लंबा खिंचने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने अविभाजित उप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री को मामला सुलझाने का जिम्मा सौंपा। मुख्यमंत्री ने बद्रीनाथ के शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी माधवाश्रम महाराज को मनाया और उनके आग्रह पर शंकराचार्य महाराज बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 10 फरवरी 1997 को भोपाल पहुंचे। उनके सानिध्य और पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा की माता संपत बाई की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में विधिवत भगवान बद्रीनाथ जी के साथ 9 देवों की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।

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