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Friday, 1 November 2019

छठ पर्व पर अस्त होते सूर्य को इस विधि से दे अर्घ्य

Chhath Puja 2019 Arag Time and Muhurat: छठ पर्व पर अस्त होते सूर्य को इस विधि से दे अर्घ्य

शास्त्रों में सूर्य को अर्घ्य देने का काफी महत्व बताया गया है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि सूर्य उपासना से खासकर सूर्य को सबेरे-सबेरे अर्घ्य देने से यश, कीर्ति, आरोग्य और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य से संबंधित दोषों का निवारण होता है और सूर्य के शुभ फल की प्राप्ति होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठ तिथि को छठ महोत्सव मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में सूर्य की आराधना करने के साथ अस्त होते सूर्य और उदय होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस साल 2 नवंबर को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बड़ी संख्या में व्रती शाम के समय समुद्र, नदी और सरोवरों के किनारों पर इकट्ठा होंगे। सूप में पूजन सामग्री को भरकर सूर्य देव को समर्पित करेंगे।
सूर्य को अर्घ्य देने की विधि :- सूर्य को अर्घ्य पवित्र नदी, सरोवर और समुद्र के किनारे पर देना सर्वोत्तम माना जाता है। लेकिन छठ पर्व पर सुविधा के अनुसार घर पर या कृत्रिम कुंड बनाकर भी सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है। वैसे उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है, लेकिन छठ पर्व पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने का प्रावधान है। सुबह नवोदित सूर्य को अर्घ्य देने का बेहतर फायदा मिलता है। सूर्य के जल चढ़ाने से पहले स्नान करना चाहिए। सूर्य को अर्घ्य देते समय सफेद वस्त्र धारण करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। सूर्य को जल तांबे के लोटे से चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही सूर्य के मंत्रों का जप करने से विशेष लाभ होता है।
छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद जैसे ठेकुआ और चावल के लड्डू जिनको कचवनिया भी कहा जाता है, बनाए जाते है। पूजा के लिए बांस की बनी हुयी टोकरी जिसको दउरा कहा जाता है उसमें पूजा के प्रसाद, फल आदि डालकर देवकारी में रख दिया जाता है। पूजा अर्चना के बाद शाम को एक सूप में नारियल, पांच प्रकार के फल,और पूजन सामग्री लेकर पुरुष अपने हाथो से उठाकर छठ घाट पर ले जाता है। इसी पवित्रता बनाए रखने के लिए इसको सर के ऊपर उठाकर रखते है। छठ घाट की तरफ जाते हुए रास्ते में महिलाये छठ का गीत गाती है।

नदी या तालाब के किनारे जाकर महिलाये नदी से मिटटी निकाल कर छठ माता का जो चौरा बनाती है उस चौरे पर पूजा का सारा सामान रखकर नारियल चढ़ाते है और दीप जलाते है। सूर्यास्त से कुछ समय पहले पूजान सामग्री लेकर घुटने भर पानी में जाकर खड़े हो जाते है और डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर वहीं पर पांच बार परिक्रमा करते है। सूर्यदेव के सभी सामग्री समर्पित करने के बाद कुछ लोग घाट पर रात बिताते हैं, जबकि कुछ वापस घर आ जाते हैं।
अर्घ्य देने के साथ ये करें उपाय :- सूर्यद्व को जल चढ़ाते समय कुछ विशेष उपा करने से मनोकामनाएं सिद्ध होती है। मनचाही नौकरी प्राप्त करने के लिए सादे जल में लाम मिर्च के बीज डालकर सूर्य को समर्पित करें। विवाह की समस्या के समाधान के लिए जल में हल्दी डालकर चढ़ाएं। जल में कुमकुम डालकर चढ़ाने से मान-सम्मान बढ़ता है। इसके साथ ही जल में लाल गुड़हल का फल डालकर चढ़ाने से साक्षात्कार में सिद्धि मिलती है।

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