डेंगू की रोकथाम करने वालों को यही पता नहीं भोपाल में डेंगू का कौन सा वायरस - .

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Wednesday, 9 October 2019

डेंगू की रोकथाम करने वालों को यही पता नहीं भोपाल में डेंगू का कौन सा वायरस

डेंगू की रोकथाम करने वालों को यही पता नहीं भोपाल में डेंगू का कौन सा वायरस

शहर में डेंगू के हर दिन 20 से 30 मरीज मिल रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भर्ती होने की जगह नहीं बची है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग को यह पता नहीं है कि शहर में डेंगू का कौन सा वायरस है। डेंगू के चार तरह के वायरस में से मरीज एक या एक से अधिक वायरस से संक्रमित हो सकता है। एक से ज्यादा वायरस से संक्रमित होने पर मरीजों की तकलीफ बढ़ जाती है। उन्हें डेंगू हीमोरेजिक फीवर (ब्लीडिंग) होने का खतरा रहता है।
डेंगू वायरस से होने वाली बीमारी है। चार तरह के वायरस डेन-1, डेन-2, डेन-3 व डेन-4 से यह बीमारी होती है। पिछले सालों में हुई जांच में भोपाल में डेंगू के चारों तरह के वायरस मिल चुके हैं। हर साल दो या तीन तरह के वायरस सक्रिय रहते हैं। इस साल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यह जांच ही नहीं कराई गई कि डेंगू का कौन सा वायरस सक्रिय है, जबकि अन्य सालों के मुकाबले इस साल ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। जबलपुर स्थित आईसीएमआर के सेंटर रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ व एनआईवी पुणे में इसकी जांच कराई जाती है। जिले में इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) की यह जिम्मेदारी होती है कि वायरस का सीरोटाइपिंग (प्रकार) की जांच कराएं। सीरोटाइपिंग पता होने से डेंगू की रोकथाम में आसानी होती है। 

एक वायरस से संक्रमित होने के बाद नहीं होती उस वायरस से बीमारी :- राष्ट्रीय पर्यावरणीय स्वास्थ्य संस्थान (नीरे) के साइंटिस्ट डॉ. अनिल प्रकाश ने बताया एक वायरस से किसी को डेंगू हो जाता है तो उसे जीवन पर्यन्त उस वायरस से सुरक्षा मिल जाती है। मसलन डेन-1 से संक्रमित व्यक्ति को कभी भी इस वायरस से डेंगू नहीं होगा, लेकिन अन्य वायरस से उसके संक्रमित होने पर बीमारी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस साल राजधानी में डेंगू हीमोरेजिक फीवर (ब्लीडिंग) के केस नहीं आ रहे हैं। इसका मतलब जो वायरस पिछले सालों में राजधानी में रहा होगा वही इस साल भी सक्रिय है। हालांकि, जांच से वायरस का पता किया जाए तो रोकथाम करना आसान होता है।
डेंगू का कोई भी वायरस हो इलाज का तरीका एक ही होता है। यह ट्रेंड पता करना आसान हो जाता है कि आने वाले साल में कौन सा वायरस आ सकता है। विश्लेषण से यह भी जानने में आसानी हो जाती है कि कौन सा वायरस ज्यादा खतरनाक है। डेंगू वायरस की प्रकार पता करने के लिए जल्द ही सैंपल भेजे जाएंगे।

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