दिव्यांगों की मेहनत के दीपों से जगमगाएगी हमारी दीपावली - .

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Friday, 4 October 2019

दिव्यांगों की मेहनत के दीपों से जगमगाएगी हमारी दीपावली

Diwali Festival 2019 : दिव्यांगों की मेहनत के दीपों से जगमगाएगी हमारी दीपावली

दिव्यांगों के हाथों से बने दीये इस दीपावली की रात में लाएंगे उल्लास का उजास...। ये दिव्यांग अपने हुनर का इस्तेमाल कर न सिर्फ मिट्टी के दीये बना रहे हैं, अपितु खूबसूरत गुलदस्ते, झूमर, लैम्प, पेपर बैग और घरों की सजावट की अन्य चीजें भी गढ़ रहे हैं। उनकी कल्पनाशक्ति और कलात्मकता के पर्याय बधाई कार्ड आपको बरबस ही आकर्षित कर लेंगे। घर और प्रतिष्ठान के दरवाजे पर सजाए जाने वाले शुभ-लाभ के संदेश भी दिव्यांग तैयार कर रहे हैं। लोगों के बीच इनके हुनर को जगह देने के लिए दीपावली से पहले शहर के ढक्कनवाला कुआं के पास हाटबाजार में मेला लगाया जाएगा। इस मेले को दीपोत्सव नाम दिया गया है।
जिला पंचायत, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और सामाजिक न्याय विभाग की ओर से यह मेला 15 और 16 अक्टूबर को लगाया जाएगा। मेले से विभिन्न् संस्थाओं को जोड़ा जा रहा है। मेले में महिलाओं के करीब 100 स्वह सहायता समूह भी शामिल होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के ये समूह भी हुनर का प्रदर्शन करेंगे। इनमें गिरोता और कलारिया के समूह की चूड़ियां तो काली बिल्लौद के समूह के बैग मिलेंगे, जैविक चीजों से बनाया साबुन भी मिलेगा। 

आश्चर्यजनक होता है उनका हुनर :- जला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नेहा मीणा बताती हैं कि दिव्यांग बच्चों ने इतने अच्छे दीये बनाए हैं कि उनके हुनर को देखकर आश्चर्य होता है। ऐसे ही बच्चों के हाथों से बनी चीजों को हम एक मुकाम देना चाहते हैं, इसीलिए दीपोत्सव मेले का आयोजन किया जा रहा है।

11 दिव्यांग बच्चों को दिया प्रशिक्षण :- शारदा मठ से जुड़ी ब्लॉसम सोसाइटी की माया बोहरा बताती हैं कि हमारी संस्था ने 11 दिव्यांग बच्चों के कौशल को देखते हुए अलग-अलग चीजें बनाने का प्रशिक्षण दिया है। तेजस नाम का 13 साल का बच्चा फ्री हैंड इतनी अच्छी पेंटिंग करता है कि बधाई कार्ड हमने उससे ही तैयार कराए हैं। कुछ बच्चों ने कुंकुम और अन्य पूजा सामग्री रखने की लकड़ी के बॉक्स सजाए हैं।

बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुसार बनाते हैं हुनरमंद :- अरुणाभ संस्था के आशीष कट्टी के अनुसार कुछ दिव्यांग जैविक खेती पर भी काम कर रहे हैं। शहर में अलग-अलग जगह वे सब्जियां बेचने का काम भी करते हैं। आसरा संस्था की राखी फड़नीस ने बताया कि दिव्यांग और अनाथ दोनों तरह के बच्चे दीये, तोरण, लकड़ी से बनी आरती की थाली सजा रहे हैं। मानसिक रूप से मंद बच्चों की रुचि और क्षमता को ध्यान में रखकर ही उन्हें हुनरमंद बनाया जाता है।

हुनर और समझ के मामले में आगे होते हैं दिव्यांग :- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक आनंद शर्मा ने बताया कि दिव्यांग बच्चों को ईश्वर ने कोई शारीरिक विकृति दी हो, लेकिन हुनर और समझ के मामले में कई बार वे सामान्य लोगों से आगे होते हैं।

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