मध्यप्रदेश का एक सरकारी स्कूल... जहां सभी छात्राओं का सरनेम 'भारतीय' - .

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Thursday, 31 October 2019

मध्यप्रदेश का एक सरकारी स्कूल... जहां सभी छात्राओं का सरनेम 'भारतीय'

विद्यार्थी चौथी-पांचवीं से ही सीखेंगे विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग की बारीकियां

स्कूलों में विद्यार्थियों को अभी 10वीं के बाद विषय चुनने पर इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, विज्ञान व गणित विषय वृहद स्तर पर पढ़ने को मिलते हैं। अब कक्षा चौथी-पांचवीं से ही इन विषयों की बारीकियां व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से सिखाई जाएगी। भोपाल में चल रही 'स्टीम कॉन्क्लेव' के पहले दिन इंदौर से गए 20 एमपी बोर्ड व सीबीएसई स्कूलों के शिक्षाविदों ने एजुकेशन सिस्टम (शिक्षा व्यवस्था) में किए जाने वाले बदलावों पर चर्चा की। इंदौर से इस कॉन्क्लेव में गए संयुक्त संचालक मनीष वर्मा ने बताया कि छात्रों को प्रोजेक्ट वर्क के माध्यम से विज्ञान, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्ट्स व गणित विषय की जानकारी देने की योजना बनाई जा रही है। स्टीम प्रोजेक्ट के तहत चार से पांच साल के बच्चों को पानी में लकड़ी का तैरने वाला जहाज बनवाया गया। इस तरह छात्र व्यावहारिक ज्ञान से जुड़कर सीखेंगे।
गिटार के तार से सिखाएंगे फ्रिक्वेंसी का फॉर्मूला :- वर्मा ने बताया कि छात्रों को संगीत से साइंस सिखाने की योजना है। गिटार के तार को जितनी दूरी से बजाया जाए, उससे अलग ध्वनि पैदा होती है। इस तरह छात्र फ्रिक्वेंसी का फॉर्मूला सीख सकेंगे। ताजमहल स्थापत्य कला को बेजोड़ नमूना है। वहां के गुंबद पिरामिड आकार के हैं। इससे बच्चों को ज्यामिति सिखाई जा सकती है। हावड़ा ब्रिज बनाने के लिए उसमें कितना लोहा लगा है, इसे बताकर छात्रों को इंजीनियरिंग की बुनियादी चीजें बताई जा सकती हैं। अभी छात्रों को फॉर्मूले और रटवाकर परीक्षा की तैयारी कराई जाती है, लेकिन अब व्यावहारिक अनुभूति कराकर सिखाने की योजना बनाई जा रही है।
37 देशों में चल रहा स्टीम प्रोजेक्ट :- स्कूली छात्रों को स्टीम प्रोजेक्ट के तहत शिक्षा देने की योजना वर्ष 2000 से शुरू हुई थी। वर्तमान में यह 37 देशों के 55 राज्यों में चल रही है। अब भारत में इसे शामिल करने की योजना है। जानकारों के मुताबिक स्टीम प्रोजेक्ट के अंतर्गत विदेश में जिन छात्रों को पढ़ाया गया, उनका व्यावहारिक ज्ञान बढ़ा हुआ पाया गया।

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