सरकारी स्कूलों में स्वच्छता राशि को एक साल देने के बाद भूला विभाग - .

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Saturday, 5 October 2019

सरकारी स्कूलों में स्वच्छता राशि को एक साल देने के बाद भूला विभाग

सरकारी स्कूलों में स्वच्छता राशि को एक साल देने के बाद भूला विभाग

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्वच्छता योजना फेल नजर आ रही है। 2016 में स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के लिए स्कूलों को सालाना 3600 रुपए देने की शुरूआत की, लेकिन सिर्फ एक साल राशि देकर स्कूल शिक्षा विभाग भूल गया। इस राशि से स्कूलों में स्वच्छता और हैंडवॉश प्रक्रिया को भी बढ़ावा देना है। इसके लिए स्कूलों में साबुन, वॉश बेसिन का प्रबंध भी किया गया, लेकिन अब स्कूलों से साबुन और बेसिन दोनों गायब है।
अब स्कूलों में ना तो स्वच्छता राशि दी जा रही है और ना ही स्वच्छता पर ध्यान दिया जा रहा है। अभी हाल ही में विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 96 फीसदी सरकारी स्कूल शाला स्वच्छता पुरस्कार में फेल पाए गए। इसका मुख्य कारण स्कूलों में शौचालय, पीने का पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था ना होना है। 

आधे स्कूलों को ही मिली राशि :- 2016 में जो स्वच्छता राशि स्कूलों को दी गई। यह राशि प्रदेश के सवा लाख प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों को मिलना था, लेकिन सिर्फ आधे स्कूलों को ही राशि मिली। कुछ स्कूलों को तो इस राशि की कोई जानकारी भी नहीं है। बच्चों में हाथ धोने की आदत को डालने के लिए लंच के समय को 10 मिनट बढ़ाया गया। 

5 स्टार रेटिंग में 96 फीसदी स्कूल बाहर :- स्वच्छ भारत-स्वच्छ विद्यालय अभियान के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों को 2016 से शाला स्वच्छता पुरस्कार दिया जा रहा है। सत्र 2017-18 में प्रदेश के लगभग साढ़े 85 हजार सरकारी स्कूलों ने नामांकन किया था। इसमें से सिर्फ 351 स्कूल ही 5 स्टार रेटिंग में शामिल हो पाए, यानि 96 फीसदी स्कूल स्वच्छता पुरस्कार की पात्रता से बाहर हो गए। इसमें स्कूलों में साफ-सफाई, शौचालय, वॉशबेसिन व हाइजिन को लेकर 5 रेटिंग की गई है। 

- अप्रैल में पंच परमेश्वर योजना को लेकर स्कूलों में आदेश जारी किए गए थे। फिर से स्कूलों को स्वच्छता के संबंध में आदेश जारी किए गए थे। साथ ही स्कूलों को मिलने वाली आकस्मिक निधि से ही पूरा प्रबंध करना है।

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