85 वार्डों में से 54 नगर निगम भोपाल, तो 31 कोलार नगर निगम में आएंगे - .

Breaking

Wednesday, 9 October 2019

85 वार्डों में से 54 नगर निगम भोपाल, तो 31 कोलार नगर निगम में आएंगे

Bhopal Municipal Corporation : 85 वार्डों में से 54 नगर निगम भोपाल, तो 31 कोलार नगर निगम में आएंगे

भोपाल को दो नगर निगम बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए संशोधित अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी गई है। कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 की धाराओं से प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भोपाल नगर निगम की बाहरी सीमाओं में परिवर्तन किए बगैर, वर्तमान नगर निगम को दो अलग-अलग भागों में बांटने के लिए सूची भी जारी कर दी है। इसके बाद सात दिनों तक भोपाल की जनता से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की गई है। इधर, कोलार को ननि बनाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। मतदान कराकर जनना चाहिए था जनता क्या चाहती है लोकसभा चुनाव के बाद नगरीय आवास एवं विकास मंत्री जयवर्धन सिंह ने कोलार नपा गठन को नामंजूर कर दिया। इसके बाद दो नगर निगम की कवायद शुरू हुई। भाजपा का कहना है कि कुछ बड़े बिल्डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए यह सारी कवायद की जा रही है। विधायकों का कहना है कि सरकार को दो नगर निगम बनाने के प्रस्ताव पर मतदान कराकर जनता का रुख जानना चाहिए था।

सांप्रदायिक ध्रुरवीकरण को मिलेगा बढ़ावा, यह निर्णय राजनीति से है प्रेरित :- अप्रत्यक्ष प्रणाली से मार्च-अप्रैल में होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले शहर को दो हिस्सों में बांटकर दो नगर निगम (भोपाल और कोलार) बनाने का ड्राफ्ट फाइनल हो गया है। बुधवार से इस पर दावे-आपत्तियां बुलाई गई हैं। सात दिन यानी 16 अक्टूबर शाम साढ़े पांच बजे तक आपत्तियां एसडीएम कार्यालय में लगाई जा सकती हैं। कलेक्ट्रेट कार्यालय के स्थानीय निर्वाचन शाखा और नगर निगम के माता मंदिर स्थित योजना प्रकोष्ठ कक्ष में भी आपत्तियां लगाई जा सकेंगी। इधर, भाजपा ने जल्दबाजी में लिए गए इस निर्णय को राजनीतिक ठहराया है। वहीं, इसके खिलाफ जनआंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। कांग्रेस के कुछ नेता सरकार के इस निर्णय के खिलाफ नजर आ रहे हैं। 

यह हैं आपत्ति के मुख्य बिंदु
- यदि नगर निगम भोपाल की वर्तमान सीमा का विभाजन किया गया तो निगम के संसाधनों जैसे भवन, वाहन, अधिकारी, कर्मचारी के विभाजन के लिए भी नीति निर्धारित करना होगा।  

- नगर निगम के खाते में वर्तमान में उपलब्ध राशि का भी बंटवारा किया जाएगा। फिलहाल निगम घाटे में है।
- नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं व पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था में कठिनाई होगी।  

अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा भोपाल नगर निगम में ही रहेगा :- भोपाल नगर निगम के लिए 85 वार्ड में से 54 वार्डों को रखा गया है। इसमें महात्मा गांधी वार्ड, एयरपोर्ट, भौंरी, हेमू कालानी वार्ड, साधु वासवानी वार्ड, महावीरिगिरी वार्ड, कोहेफिजा, रॉयल मार्केट, बाग मुंशी हुसैन खां, ईदगाह हिल्स, बाबू जग जीवन राम वार्ड, नारियल खेड़ा, गीताजंली वार्ड, शाहजहांनाबाद, जेपी नगर, मोतीलाल नेहरू वार्ड, इब्राहिमगंज, राम मंदिर वार्ड, लाल बहादुर शास्त्री वार्ड, महावीर स्वामी वार्ड, जैन मंदिर वार्ड, मोती मजिस्द, इस्लामपुरा, रानी कमलापति वार्ड, स्वामी विवेकानंद वार्ड, डॉ अंबेडकर वार्ड, गोस्वामी तुलसीदास वार्ड, रानी आवंतीबाई वार्ड, मौलाना अबुल कलाम आजाद वार्ड, कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड, छत्रपति शिवाजी वार्ड, जवाहरलाल नेहरू वार्ड, पंडित मदन मोहन मालवीय वार्ड, रवींद्र नाथ टैगोर वार्ड, जहांगीराबाद, चांदबड़, कपड़ा मिल, सेमरा, नवीन नगर, ऐशबाग, बाग फरहत अफजा, महारानी लक्ष्मी बाई वार्ड, महाराणा प्रताप वार्ड, सुभाष चंद्र बोस बोर्ड, इंदिर गांधी वार्ड, पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड, डॉ राजेंद्र प्रसाद वार्ड, अरेरा कॉलोनी, आशा निकेतन, गुलमोहर, शाहपुरा, गुरुनानक देव वार्ड, पंजाबी बाग, दशहरा मैदान अशोका गार्डन को शामिल किया जाएगा 

गोविंदपुरा सहित करोंद तक का हिस्सा कोलार नगर निगम में होगा शामिल :- कोलार नगर निगम में नगर निगम के 85 में से 31 वार्डों को रखा गया है। इसमें मिसरोद, जाटखेड़ी, बरकतउल्लाह, बाग मुगालिया, बरखेड़ा पठानी, साकेत नगर, शक्ति नगर, कस्तूरबा, बरखेड़ा, बीएचईएल, गोविंदपुरा, खजूरीकलां, हथाई खेड़ा, गौतम बुद्ध वार्ड, सोनागिरी, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, नरेला संकरी, इंद्रपुरी, आयोध्या नगर, आरजीपीवी, भोपाल मेमोरियल अस्पताल, भानपुर, बड़वई, छोला, रूसल्ली, करोंद, नवीबाग, सर्वधर्म कोलार, कान्हाकुंज, दानिश कुज, सनखेड़ी, रतनपुर सड़क, कटारा हिल्स को शामिल किया जाएगा।
दो नगर निगम बनने से यह होंगे नुकसान :- 
सुविधा : शहर में पानी सप्लाई नर्मदा, कोलार और बड़े तालाब से होती है। पानी का बंटवारा करने में बड़ी समस्या आएगी। वर्तमान में सड़कें अलग-अलग एजेंसियों के पास है, दो नगर निगम होने से सड़कों के मेंटेनेंस प्रभावित होंगे। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को लेकर भी समस्या होगी।
आय : नगर निगम में नए शहर से सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स आता है, जबकि पुराने शहर से संपत्तिकर और जल उपभोक्ता प्रभार कम आता है। ऐसे में पुराने शहर में आय की कमी से विकास कार्यों पर असर पड़ेगा। स्मार्ट सिटी : स्मार्ट सिटी के काम नगर निगम सीमा में किए जा रहे हैं। दो नगर निगम होने से स्मार्ट सिटी के पैन सिटी मॉडल के तहत काम कहां होंगे, यह तय नहीं है। इससे विवाद होंगे।

No comments:

Post a Comment

Pages