64 साल की उम्र में बाइक से 2600 किलोमीटर की यात्रा कर लौटे हैदरी - .

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Thursday, 31 October 2019

64 साल की उम्र में बाइक से 2600 किलोमीटर की यात्रा कर लौटे हैदरी

64 साल की उम्र में बाइक से 2600 किलोमीटर की यात्रा कर लौटे हैदरी

अनेकता में एकता की जो मिसाल भारत में देखी जा सकती है, वह यकीनन कहीं और नहीं दिखती। यहां की संस्कृति, भौगोलिक परिस्थितियां, लोगों का बर्ताव सब कुछ भिन्न-भिन्न होकर भी एक सूत्र में पिरोया नजर आता है। यही वजह है कि मैं पूरे देश को और भी नजदीक से देखना चाहता हूं। इसके लिए मैंने बाइक राइडिंग को चुना, ताकि गांव, शहर, जंगल, खेत-खलिहानों के बीच से होकर सभी को देख सकूं, जान सकूं।' यह कहना है डॉ. जाकिर हुसैन हैदरी का, जो पेशे से एनेस्थेटिक्स हैं और शौकिया बाइक राइडर। हाल ही में ये इंदौर से आंध्रप्रदेश के श्रीशैलम तक की यात्रा करके लौटे हैं। अपने घर वापस आकर इन्होंने यात्रा के अनुभव नईदुनिया के साथ साझा किए। 64 वर्षीय डॉ.हैदरी 1992 से बाइक राइडिंग कर रहे हैं। ये देश के विभिन्न् प्रांतों की यात्रा कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पहले वर्ष में एक बार ही बाइक राइड कर देश घूमने निकलता था, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है देश को जानने, समझने और देखने की हसरत भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब तो वर्ष में दो बार जाना शुरू कर दिया है। इंदौर से शुरू हुई 2600 किमी की यात्रा धुलिया, चालीसगांव, औरंगाबाद, शोलापुर होते हुए हैदराबाद के आउटर रूट के जरिए श्रीशैलम पहुंची। वहां से हैदराबाद, नागपुर हाईवे, बैतूल और फिर नेमावर हाईवे होते हुए अपने शहर आया। इस पूरे सफर में मैंने देखा कि बारिश के बावजूद आंध्रप्रदेश की सड़क बहुत अच्छी थी, जबकि हरदा से इंदौर तक की सड़क बहुत खराब मिली। हमें भी आंध्रप्रदेश से यह सीखना चाहिए कि वहां सड़कें ठीक कैसे रहती हैं। 

मालवा जैसा जोश कहीं नहीं दिखा :- 20 से 28 अक्टूबर तक की इस नौ दिनी यात्रा में दीपोत्सव भी बाहर का ही देखा। मैंने महसूस किया कि जिस जोश और उत्साह से मालवा या पूरे मध्यप्रदेश में त्योहार मनाए जाते हैं, वैसा जोश दक्षिण और महाराष्ट्र में भी नजर नहीं आता। दीपावली की रात मैं महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा पर बसे मुलताई में था, वहां भी दीपावली का उत्साह नहीं दिखा। वाकई में हम मालवी लोग हर त्योहार को दिल से मनाते हैं। 

ये सभी अनुभव पहली बार हुए :- इस यात्रा में मुझे जो अनुभव हुए, वह अब तक की यात्रा में नहीं हुए। इस बार मुझे पूरे रास्ते में हर दिन कहीं न कहीं बारिश जरूर मिली। कई बार मैं भीगा भी। कभी स्थिति यह भी बनी कि मीलों तक ऐसा कोई स्थान नहीं था, जहां बारिश से बचने के लिए रुका जा सके, ऐसे में भीगते हुए ही बाइक चलाई। इस रोमांच का भी अपना अलग ही मजा था। इसके अलावा श्रीशैलम के रास्ते में करीब 100 किमी का अभयारण्य मिला और रास्ते में हिरण आदि भी दिखे, जो अपने आप में सुखद अनुभव रहा। श्रीशैलम में जो डेम देखा उसमें बेहद बहाव था। स्थानीय लोगों का भी कहना था कि पहली बार इस डेम में इतना पानी देखा है।

फिटनेस का रखता हूं ध्यान :- मेरे पास 125 सीसी की बाइक है और मैं अकेले ही यात्रा पर जाता हूं। इन 27 साल में कभी भी मेरे साथ कोई वारदात नहीं हुई। बल्कि कई जगह तो अनजानों ने मेरी मदद, आवभगत की। वास्तव में हमारे देश का जनमानस बहुत अच्छा है और जब किसी को पता चलता है कि मैं डॉक्टर हूं तो सम्मान और बढ़ जाता है। जहां तक बात इस उम्र में भी राइडिंग की है तो मैं सेफ्टी और फिटनेस का पूरा ध्यान रखता हूं। नियमित साइकिलिंग, रनिंग और एक्सरसाइज करता हूं।

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