डेंगू ने भी तोड़ा रिकॉर्ड, एक महीने में अब तक सबसे ज्यादा 380 मरीज - .

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Tuesday, 1 October 2019

डेंगू ने भी तोड़ा रिकॉर्ड, एक महीने में अब तक सबसे ज्यादा 380 मरीज

Dengue Outbreak In Bhopal : डेंगू ने भी तोड़ा रिकॉर्ड, एक महीने में अब तक सबसे ज्यादा 380 मरीज

बारिश के साथ ही डेंगू ने भी इस साल रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लगातार बारिश के चलते सितंबर में डेंगू मरीजों की संख्या 380 तक पहुंच गई है। डेंगू मरीजों की संख्या का यह रिकार्ड सिर्फ एक महीने का है। इसके पहले एक महीने में सबसे ज्यादा 288 मरीज अक्टूबर 2017 में मिले थे। सितंबर 2017 में डेंगू के 243 मरीज मिले थे। इस साल अब तक का आंकड़ा 380 तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल देर तक बारिश के चलते अक्टूबर-नवंबर में मरीजों की संख्या और बढ़ेगी। पिछले सालों के आंकड़े देखें तो डेंगू मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या अक्टूबर में रहती थी। इस साल सितंबर में ही सारे रिकार्ड टूट गए हैं। अभी तक दिवाली के बाद मरीज कम होने लगते थे, पर इस साल नवंबर आखिर तक यही स्थिति रहने की उम्मीद है। गनीमत इस बात की है इस साल डेंगू होमोरेजिक फीवर के केस नहीं हैं। डेंगू बुखार की इस अवस्था में मौत का डर भी रहता है
20 फीसदी घरों में लार्वा, हर दिन 20 मकान मालिकों पर जुर्माना :- डेंगू मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लार्वा सर्वे कर रही है। रोजाना करीब डेढ़ हजार घरों में लार्वा सर्वे किया जा रहा है। इममें 20 फीसदी घरों में लार्वा मिल रहा है। हर दिन 15 से 20 मकान मालिकों पर जुर्माना किया जा रहा है। सोनागिरी स्थित बीमा अस्पताल में लार्वा मिलने पर 10 हजार रुपए जुर्माना किया गया था। कई घरों में चौथी बार लार्वा मिला है, इसके बाद भी उन पर जुर्माना नहीं किया जा रहा है।
घबराने की जरूतर नहीं है। डेंगू के केस ज्यादा जरूर हैं, पर खतरनाक नहीं है। पूरी संभावना है कि राजधानी में डेंगू का इस साल भी वही वायरस होगा जो पिछले साल था, इसलिए खतरनाक नहीं है। लगातार बारिश के चलते मच्छर जनित बीमारियां कम होती हैं। अब रुक-रुककर बारिश हो रही है, इसलिए मरीजों की संख्या अक्टूबर-नवंबर में और बढ़ेगी। डेंगू से सिर्फ उन्हीं लोगों को दिक्कत होती है जो जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है। इसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैंं। बुखार के 30 मरीजों की जांच कराई जाए तो 10 पॉजिटिव आ सकते हैं।
लगातार सर्वे चल रहा है :- इस साल लगातार बारिश के चलते मरीजों की संख्या ज्यादा है। विभाग ज्यादा प्रभावित कॉलोनियों में विशेषज्ञ शिविर लगाकर रोकथाम कर रहा है। लार्वा सर्वे भी लगातार किया जा रहा है। डेंगू से डरने की जरूरत नहीं है। यह सामान्य वायरल इंफेक्शन की तरह ही है।
-अमले की कमी के चलते पूरे शहर में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए शहर में सिर्फ 44 टीमें लगाई गईं।
-आशा कार्यकर्ताओं को अगस्त में लार्वा सर्वे में लगाया गया, जबकि पिछले साल जून से ही लगा दिया गया था।
-नगर निगम ने भी शुरू से स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम नहीं किया। कई बार लार्वा मिलने के बाद भी जुर्माना नहीं किया गया
-रहवासियों ने सहयोग नहीं किया। मलेरिया विभाग के अमले की समझाइश के बाद भी कई घरों में तीसरी और चौथी बार लार्वा मिल रहा है।
-पायरेथ्रम कीटनाशक से धुआं करने पर मच्छरों पर असर कम होता है। इसके बाद भी नगर निगम द्वारा साइफ्लोथ्रिन से धुआं सितंबर में डेंगू फैलने पर शुरू किया गया।
-दफ्तरों व स्कूलों की टंकियों में भी डेंगू के लार्वा हैं, दफ्तरों के प्रमुखों को इसकी फिक्र ही नहीं है।
डेंगू से निपटने के लिए यह करें
-फुल कपड़े पहनें।
- कूलर, गमला, चिड़ियों के बर्तन टंकियों का पानी हर हफ्ते बदलें।
- पानी के कंटेनरों में कीड़े की तरह तैरते हुए लार्वा दिखेंगे तो उन्हें मारने के लिए सरसों का तेल डालें।
- दिन में मच्छरदानी लगाएं।
- तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर में लाल चकत्ते या दांत से खून आ रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- डेंगू होने पर एस्प्रिन दवा न लें।
डेंगू के लक्षण
-सिर दर्द के साथ तेज बुखार,
आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, उल्टी, शरीर में लाल चकत्ते या रेशे
-दांतों से खून आना।

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