Ola Cabs को ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचाया, इन दो भारतीयों की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया - .

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Thursday, 26 September 2019

Ola Cabs को ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचाया, इन दो भारतीयों की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया

Ola Cabs को ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचाया, इन दो भारतीयों की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया

भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी, ये नाम हैं उन दो दोस्‍तों के जिन्‍होंने अपने दम पर एक स्‍टार्ट अप को इतनी सफलता दिलाई कि आज उनकी सफलता का डंका पूरे विश्‍व में बज रहा है। ओला कैब्स अब भारत की सीमाओं को पार करके ऑस्ट्रेलिया में भी सेवाएं देना शुरू कर चुकी हैं। इसकी नजर अन्य देशों में भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। इसका सपना देखा था दो दोस्तों ने। भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद छह वर्ष के समय में उबेर को टक्कर देने वाला ओला स्टार्टअप खड़ा कर दिखाया। भाविश ने कंपनी में कस्टमर एंड पार्टनर रिलेशंस संभाला तो अंकित ने टेक्निकल चीजों पर ध्यान दिया। दोनों की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया।
कभी भाविश माइक्रोसॉफ्ट में काम करते थे और फिर जल्दी ही नौकरी से बोर हो गए। वे भारत लौटे तो इस उद्देश्य के साथ कि कुछ रचनात्मक और मन का काम करना है। यहां उनकी ही तरह अंकित भाटी भी सोच रहे थे। तब उन्होंने अंकित भाटी के साथ मिलकर ओला शुरू की। भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी, ये नाम हैं उन दो दोस्‍तों के जिन्‍होंने अपने दम पर एक स्‍टार्ट अप को इतनी सफलता दिलाई कि आज उनकी सफलता का डंका पूरे विश्‍व में बज रहा है। ओला कैब्स अब भारत की सीमाओं को पार करके ऑस्ट्रेलिया में भी सेवाएं देना शुरू कर चुकी हैं। इसकी नजर अन्य देशों में भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। इसका सपना देखा था दो दोस्तों ने।
भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद छह वर्ष के समय में उबेर को टक्कर देने वाला ओला स्टार्टअप खड़ा कर दिखाया। भाविश ने कंपनी में कस्टमर एंड पार्टनर रिलेशंस संभाला तो अंकित ने टेक्निकल चीजों पर ध्यान दिया। दोनों की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया। कभी भाविश माइक्रोसॉफ्ट में काम करते थे और फिर जल्दी ही नौकरी से बोर हो गए। वे भारत लौटे तो इस उद्देश्य के साथ कि कुछ रचनात्मक और मन का काम करना है। यहां उनकी ही तरह अंकित भाटी भी सोच रहे थे। तब उन्होंने अंकित भाटी के साथ मिलकर ओला शुरू की। 
शुरुआत में दोनों का अपने काम से प्रेम था और आखिर यही तो वह बात थी जो उन्हें जोड़े हुए थे। उन शुरुआती दिनों में उन पर सफल होने का जुनून था। दोनों डटकर मेहनत करते थे। उन दिनों कस्टमर के फोन उठाते थे और किसी को छोड़नेया लेने के लिए टैक्सी में एयरपोर्ट भी चले जाते थे। वे अपने स्टार्टअप की बारिकियों को सीख रहे थे और जल्दी ही उन्होंने हर चीज पर अपनी पक़ड बना ली। आखिरकर उनकी यह मेहनत रंग लाई। 
जोड़ी हिट रही। शुरुआत में दोनों का अपने काम से प्रेम था और आखिर यही तो वह बात थी जो उन्हें जोड़े हुए थे। उन शुरुआती दिनों में उन पर सफल होने का जुनून था। दोनों डटकर मेहनत करते थे। उन दिनों कस्टमर के फोन उठाते थे और किसी को छोड़नेया लेने के लिए टैक्सी में एयरपोर्ट भी चले जाते थे। वे अपने स्टार्टअप की बारिकियों को सीख रहे थे और जल्दी ही उन्होंने हर चीज पर अपनी पक़ड बना ली। आखिरकर उनकी यह मेहनत रंग लाई। जोड़ी हिट रही।

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