तहसीलदार ने भेजा नोटिस, असंगत तरह से बेच दी ग्रीन बेल्ट की जमीन - .

Breaking

Sunday, 22 September 2019

तहसीलदार ने भेजा नोटिस, असंगत तरह से बेच दी ग्रीन बेल्ट की जमीन

तहसीलदार ने भेजा नोटिस, असंगत तरह से बेच दी ग्रीन बेल्ट की जमीन

जमीन की जानकारी छिपाकर किस तरह के खेल शहर में हो रहे हैं, इसका बड़ा उदाहरण सामने आया। जुर्माने सहित डायवर्शन शुल्क की बकाया राशि 14 लाख पार हो गई तो कोठी महल के तहसीलदार सुनील पाटील ने नोटिस भेजा। पर जमीन मालिक ने पैसा जमा नहीं कराया। जमीन की जानकारी जुटाई तो पता चला उस पर प्लॉट काटकर बेच दिए। इतना ही नहीं ग्रीन बेल्ट की जमीन भी लोगों को बेच दी। तहसीलदार के आदेश पर अब इस जमीन को भी कुर्क करने की तैयारी शुरू हो गई है।
इंदौर रोड पर सिंहस्थ बायपास के करीब शिप्रा नदी से लगी जीवनखेड़ी गांव की जमीन का यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन ऋषिनगर निवासी प्रदीप पिता रामचंद्र मूले के नाम पर है। सर्वे नंबर 54/1 की 1.16 हेक्टेयर जमीन का आधे से अधिक हिस्सा ग्रीन बेल्ट में आता है। यह जमीन भी लोगों को प्लॉट काटकर बेच दी गई है। इस कारण राजस्व विभाग ने जमीन मालिक पर 13.92 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने सहित डायवर्शन शुल्क का 14 लाख 33 हजार 760 रुपए बकाया है।
तहसीलदार इसे जमा कराने के लिए बकायादार मूले को कई बार नोटिस जारी कर चुके हैं, लेकिन यह पैसा जमा नहीं कराया जा रहा। हाल ही में कोठी महल के तहसीलदार पाटील ने रिकॉर्ड तलब किया तो पता चला जमीन लोगों को बेच दी गई जबकि आधी से अधिक जमीन ग्रीन बेल्ट में है। बावजूद इसके जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई और जिम्मेदार कुछ न कर सके। यही कारण है कि बकायादार द्वारा डायवर्शन शुल्क भी जमा नहीं कराया जा रहा। तहसीलदार पाटील ने जमीन कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है। संभवतः एक-दो दिन में जमीन की कुर्की कर कब्जा प्रशासन को सौंपा जा सकता है।
शून्य हो सकती रजिस्ट्रियां :- जमीन को कुर्क करने के बाद ग्रीन बेल्ट की रजिस्ट्रियां शून्य भी घोषित हो सकती हैं। जमीन की कुर्की के बाद प्रभावित लोगों के माध्यम से जमीन से जुड़ी असली कहानियां भी सामने आ सकती हैं। तहसीलदार की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इसके पहले अमन गृह निर्माण सहकारी संस्था की जमीन को कुर्क किया जा चुका है। अब इसे नीलाम करने की तैयारी चल रही है। इसका आदेश भी विधिवत जारी किया जा चुका है।
ग्रीन बेल्ट की जमीन कैसे बिक रही :- प्रशासन के सामने यह भी बड़ा सवाल है कि ग्रीन बेल्ट की जमीन सुरक्षित होने के बाद भी बिक कैसे रही। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, उन पर भी कार्रवाई की जाए। प्रशासन ने कागजों पर ही ग्रीन बेल्ट घोषित कर रखा है, जबकि मौके पर ग्रीन बेल्ट खत्म होता जा रहा है। ग्रीन बेल्ट की जमीन को सुरक्षित बनाने के लिए भी प्रशासन को सख्त कदम उठाना चाहिए, जिससे कि भविष्य में यह जमीन बेची न जा सके।
बकायादारों पर नकेल कसने की तैयारी :- जिन लोगों पर डायवर्शन शुल्क बकाया है, तहसीलदारों के नोटिस को भी तवज्जो नहीं दे रहे। इससे शुल्क जमा नहीं हो पा रहा। कोठी महल के तहसीलदार पाटील ऐसे बकायादारों पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे भी बकायादारों में खलबली मचने लगी है।

No comments:

Post a Comment

Pages