उज्जैन में बिक रहा था नकली मावा-घी, प्रशासन ने की कार्रवाई - .

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Saturday, 21 September 2019

उज्जैन में बिक रहा था नकली मावा-घी, प्रशासन ने की कार्रवाई

उज्जैन में बिक रहा था नकली मावा-घी, प्रशासन ने की कार्रवाई

खाद्य व सुरक्षा अधिकारियों द्वारा उन्हेल की दो दुकानों से लिए गए मावे के सैंपल जांच में फेल होने पर जुर्माना करने के साथ ही पुलिस थाने में 420 का केस दर्ज कराया गया है। दोनों दुकानों से लिए गए नमूने भोपाल की प्रयोगशाला भेजे गए थे। प्रशासन की इस सख्ती से मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने वालों में हड़कंप है। जिले में 420 के तहत यह पहली कार्रवाई की गई है। मिलावट पर नकेल कसने के लिए कलेक्टर शशांक मिश्र के निर्देशन में लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में कुछ दिनों पहले खाद्य व सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने उन्हेल में अश्विन ट्रेडर्स व उन्हेल स्टेशन स्थित सिद्घि डेयरी से मावे के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे।
मामले में अश्विन ट्रेडर्स पर 40 हजार रुपए का जुर्माना भी किया जा चुका है। दोनों फर्मों के खिलाफ मंगलवार को उन्हेल थाने में धारा 420 के तहत प्रकरण भी दर्ज करा दिया गया है। जांच रिपोर्ट में दोनों फर्मों के मावे के नमूने अमानक स्तर के पाए गए। यानी वे खाने के लिए उपयोग नहीं किए जा सकते। खाद्य सुरक्षा विभाग ने आरोपी सूरज पिता कांतिलाल जैन व अश्विन जैन पिता ओमप्रकाश जैन के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया।
व्यापारियों ने बंद की दुकानें :- प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मावा और घी बेचने वाले व्यापारियों में भय व्याप्त हो गया है। कुछ व्यापारियों ने तो मावे और घी की दुकानें बंद ही कर दी हैं। जो व्यापारी दुकान चालू रख रहे हैं, वे क्वालिटी के प्रति काफी सतर्कता बरत रहे हैं।
केलकर पर लग चुकी रासुका :- केलकर परिसर में संचालित होने वाली घी की फैक्ट्री में नकली मावा बनाने के मामले में संचालक कीर्तिवर्धन केलकर पर रासुका लगाई जा चुकी है। केलकर को रासुका के तहत इंदौर भेजा गया था। फैक्ट्री से लिए गए सेंपल भी अमानक स्तर के पाए गए हैं। इनकी अभी जांच चल रही है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। इस बार खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मावा बेचने वाले दो व्यापारियों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
व्यापारी ने राष्ट्रीय प्रयोगशाला में लगाई अर्जी :-  खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद उन्हेल के व्यापारी अश्विन जैन ने राष्ट्रीय प्रयोगशाला, मैसूर में दोबारा जांच का आवेदन भेजा है। जैन का कहना है उनके यहां के मावे में शुद्घ घी का प्रतिशत तय मात्रा से 12 प्रतिशत अधिक है लेकिन बीआर वैल्यू की राज्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है। अगर मावा अमानक होता तो दूध भी अमानक निकलता जबकि दूध की रिपोर्ट मानक है। इसी दूध से मावा भी बनता है।

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