Maruti Suzuki में 3,000 कांट्रैक्ट कर्मियों की छंटनी, 13 लाख लोगों की नौकरियां संकट में - .

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Tuesday, 27 August 2019

Maruti Suzuki में 3,000 कांट्रैक्ट कर्मियों की छंटनी, 13 लाख लोगों की नौकरियां संकट में

Maruti Suzuki में 3,000 कांट्रैक्ट कर्मियों की छंटनी, 13 लाख लोगों की नौकरियां संकट में

वाहन उद्योग में मंदी के कारण नौकरियां जाने लगी हैं। मारुति सुजुकी इंडिया ने 3,000 कांट्रैक्ट (अस्थायी) कर्मचारियों की छंटनी की है। कंपनी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने मंगलवार को यह जानकारी दी। भार्गव ने कहा कि कंपनी ने 3,000 अस्थायी कर्मचारियों का कांट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री मांग में भारी कमी का सामना कर रही है। कंपनी की सालाना आम बैठक में भार्गव ने शेयरधारकों से कहा, 'कारों की कीमतों में सुरक्षा मानदंडों और भारी टैक्स जोड़ दिए गए हैं। इससे ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हो रही है।'

वाहन कंपनियों के प्रतिनिधि संगठन सियाम ने कहा है कि मंदी के कारण अब तक ऑटोमोबाइल सेक्टर में करीब 20 हजार कर्मियों की छंटनी हो गई है और 13 कर्मचारी कभी भी नौकरी गंवा सकते हैं।
छंटनी की वजहें

- जुलाई में पैसेंजर वाहनों का उत्पादन करीब 17 प्रतिशत घटा
- देश में तेज रफ्तार से घट रही है उपभोक्ता वस्तुओं की मांग

- एनबीएफसी के पास कार खरीदारों को कर्ज देने के लिए फंड नहीं
- जीएसटी के तहत टैक्स की ऊंची टैक्स दरों के कारण कीमतें बढ़ीं

- ऊंची बीमा लागत और ओला-ऊबर जैसी टैक्सी सर्विस की लोकप्रियता
शेयर बाजार पर असर :- इस साल अब तक बंबई स्टॉक एक्सचेंज के ऑटो इंडेक्स में करीब 23 प्रतिशत गिरावट आई है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी का शेयर 2019 की शुरुआत से अब तक 20 प्रतिशत गिर गया है।
वाहन उद्योग में मंदी के मायने :- घरेलू अर्थव्यवस्था की मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का योगदान करीब 49 फीसदी है। इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जाहिर है, इस सेक्टर में मंदी का नकारात्मक असर नौकरियों और सरकार की आय पर होता है।
लगातार 9 महीने घटी बिक्री :- रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में लगातार नौवें महीने वाहनों की बिक्री में गिरावट आई। कई वाहन कंपनियां कीमते बढ़ने से रोकने के लिए कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं या उत्पादन अस्थायी रूप से रोक रही हैं।

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