सुषमा स्वराज के सहयोग को भूला नहीं पाएगा पाणीग्राही परिवार - .

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Monday, 19 August 2019

सुषमा स्वराज के सहयोग को भूला नहीं पाएगा पाणीग्राही परिवार

सुषमा स्वराज के सहयोग को भूला नहीं पाएगा पाणीग्राही परिवार

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आकस्मिक निधन से जहां पूरा देश स्तब्ध है वहीं जगदलपुर शहर का पाणीग्राही परिवार भी अपने सहयोगी के रूप में सुषमा स्वराज के निधन पर व्यथित है। यह परिवार सुषमा स्वराज के योगदान को आजन्म भूल नहीं पाएगा। विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज के विशेष प्रयास के चलते ही अंतरराष्ट्रीय वेटरन मैराथन में शामिल होने श्रीलंका गए तथा एक दुर्घटना में मृत राजेंद्रनाथ पाणीग्राही के पार्थिव शरीर को 26 अक्टूबर 2017 को विशेष विमान से कोलंबो भारत भिजवाया गया था। अक्टूबर 2017 में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय वेटरन एथलेटिक्स स्पर्धा आयोजित की गई थी।
प्रतियोगिता में भारतीय टीम के साथ शहर के वेटरन खिलाड़ी के रूप में राजेंद्रनाथ पाणीग्राही भी कोलंबो पहुंचे थे। प्रतियोगिता संपन्न होने के बाद जब यह टीम स्वदेश लौट रही थी तभी कोलंबो रेलवे स्टेशन के पास एक दुर्घटना में राजेन्द्र नाथ पाणीग्राही की मौत हो गई  विदेश से शव को स्वदेश लाना तथा विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पाणीग्राही परिवार के बस में नहीं था इसलिए दिवंगत के पुत्र हेमंत पाणीग्राही ने ट्विटर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से सहायता मांगी थी। सूचना मिलते ही विदेश मंत्रालय ने तत्परता से कदम उठाते हुए कोलंबों में भारतीय दूतावास और श्रीलंका सरकार से संपर्क कर राजेन्द्रनाथ पानीग्राही का पार्थिव शरीर भारत लाने की कार्रवाई शुरू की थी।
विमान से विशाखापट्टनम लाया गया था पार्थिव शरीर :- राजेंद्रनाथ पाणीग्राही का पार्थिव शरीर कोलंबो से विमान से विशाखापट्टनम लाया गया। उसी दिन वहां से सड़क मार्ग से पार्थिव शरीर जगदलपुर पहुंच गया था। स्वर्गीय राजेन्द्रनाथ पानीग्राही के पुत्र डॉ तुषार पानीग्राही ने उन दिनों को याद करते नईदुनिया से चर्चा में बताया कि विदेश में पिता के निधन के बाद उनके परिवार के पास पार्थिव शरीर लाने की विकट समस्या खड़ी हो गई थी। उस समय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हमारे परिवार के लिए दूत बनकर सामने आई। उनकी पहल और निर्देश पर कोलंबो से लेकर दिल्ली तक भारतीय दूतावास फोन पर हमारे संपर्क पर रहा था। पार्थिव शरीर लाने के लिए की जारी प्रक्रिया की जानकारी भी अधिकारियों के द्वारा हमे लगातार दी जा रही थी। हमारा परिवार सुषमा स्वराज की मानवीय संवेदना और सहायता के लिए उठाए गए कदम को जीवन भर नहीं भूल सकते। हमारा पूरा परिवार उनका ऋणी रहेगा।

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