केरल में पिछले साल बाढ़ और वर्तमान में अधिक बारिश से इलायची की फसल को नुकसान - .

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Saturday, 10 August 2019

केरल में पिछले साल बाढ़ और वर्तमान में अधिक बारिश से इलायची की फसल को नुकसान

केरल में पिछले साल बाढ़ और वर्तमान में अधिक बारिश से इलायची की फसल को नुकसान

केरल में लगातार बारिश और पिछले साल बाढ़ से पुराने पौधों को नुकसान के साथ-साथ स्टॉक की कमी से इलायची के भाव रिकॉर्ड ऊंचा स्तर पार कर गए हैं। इन भाव पर भी निर्यात और आगामी त्योहारों के लिए मांग बनी हुई है। नई फसल में देरी और उत्तर भारत से बढ़ती मांग के चलते पिछले शनिवार को केरल के इडुक्की में हुई नीलामी में छोटी इलायची की कीमत 7,000 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। औसत भाव 4,733 रुपए प्रति किलो रहा। एक महीने पहले इसका भाव 3,000 रुपए प्रति किलो के आसपास था।
नई फसल आने में देरी से छोटी इलायची के भाव बढ़े हैं। इडुक्की इलायची की बुआई के मामले में देश में अव्वल। आमतौर पर जुलाई में फसल की तुड़ाई (हार्वेस्टिंग) शुरू हो जाता है। मानसून में शुरुआती देरी और उसके बाद लगातार मानसून के सक्रिय रहने से अब फसल सितंबर मध्य तक आने की संभावना है। 'कार्डमम ग्रोअर्स एसोसिशन' के अनुसार नई फसल को खेत से निकालने का काम अब सितंबर में ही शुरू हो पाएगा। नई फसल आने में देरी और सप्लाई घटने की वजह से भाव और बढ़ सकते हैं। पिछले साल अगस्त में केरल में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से इलायची की खेती प्रभावित हुई थी, इससे पैदावार में भारी गिरावट आई, जिससे साल भर स्टॉक की कमी रही। 

बारिश में देरी का भी असर :- कार्डमम प्रोसेसिंग एंड मार्केटिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी के मुताबिक इस साल मई तक बारिश नहीं हुई, जिससे पौधों में फूल समय पर नहीं आए। ऐसे में फसल तैयार होने में देरी हो रही है। मानसून सीजन के शुरुआत में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई और अब लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में इस साल पैदावार पिछले साल से कम आने की आशंका है। नीलामी में पिछले माह तक रोजाना करीब 20-30 टन छोटी इलायची आती थी, जो अब घटकर 10 टन रह गई है। 

स्टॉक करीब-करीब खत्म :- किसानों के पास रखा स्टॉक करीब-करीब खत्म हो गया है। इस बीच त्योहारी सीजन से पहले उत्तर भारत से इलायची की मांग बढ़नी शुरू हो गई है। अगले महीने इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है।बाजार को उम्मीद है कि अगले एक महीने में नई फसल आने लगेगी। उसके बाद कीमतें कुछ नीचे आएंगी। बढ़ती कीमतों के चलते खाड़ी देशों को निर्यात जून के बाद से लगभग ठप है।

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