आदिवासी विकासखंडों में बिना लाइसेंस वाले साहूकार अब नहीं वसूल पाएंगे कर्ज - .

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Monday, 19 August 2019

आदिवासी विकासखंडों में बिना लाइसेंस वाले साहूकार अब नहीं वसूल पाएंगे कर्ज

MP कैबिनेट बैठक : आदिवासी विकासखंडों में बिना लाइसेंस वाले साहूकार अब नहीं वसूल पाएंगे कर्ज

प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखंडों में बिना लाइसेंस वाले साहूकारों आदिवासियों को दिया कर्ज नहीं वसूल पाएंगे। इसकी वसूली करने पर उन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर एक लाख रुपए जुर्माना और तीन साल तक की सजा हो सकेगी। इसके लिए सोमवार को कैबिनेट ने मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम (संशोधन) अध्यादेश 2019 को स्वीकृति दे दी। राष्ट्रपति के मंजूरी मिलते ही यह प्रभावी हो जाएगा। उधर, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने इस प्रावधान को सभी विकासखंडों में लागू करने की बात उठाई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में देखेंगे।

जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि आदिवासियों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए सरकार मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 में संशोधन करने जा रही है। इसके तहत लाइसेंस फीस 500 रुपए से बढ़कर पांच हजार रुपए हो जाएगी। ब्याज दर राज्य सरकार तय करेगी। बिना लाइसेंस सूद पर राशि देना गैर कानूनी होगा और ऐसी किसी भी राशि की वसूली नहीं होगी। ऐसा किए जाने पर संज्ञेय अपराध माना जाएगा। कानून तोड़ने पर तीन साल की सजा व एक लाख रुपए का जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, कुछ मंत्रियों ने कहा कि तीन साल की सजा का प्रावधान रखने से प्रकरण मुख्य जिला न्यायाधीश की कोर्ट में ले जाना होगा। इसके मद्देनजर सजा की अवधि को कुछ कम किया जा सकता है। इस तरह के मामलों की कोर्ट में याचिका भी दाखिल नहीं होगी। 

एक ही निविदा पर खरीदेंगे वन मित्र सॉफ्टवेयर :- उधर, वन अधिकार अधिनियम के निरस्त दावों को फिर परीक्षण करने के लिए महाराष्ट्र के नॉलेज कार्पोरेशन लिमिटेड का वन मित्र सॉफ्टवेयर एक ही निविदा पर खरीदा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने दावे निरस्त करने को लेकर कहा कि 80 साल से काबिज व्यक्ति से पूछा गया कि वो बताए कि वनभूमि पर कब्जा था। ऐसे प्रकरण निरस्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसने गलत प्रकरण निरस्त किए हैं, उन्हें दंडित किया जाएगा। साथ ही कहा कि आदिम जाति और वन विभाग साथ बैठकर नीति बनाए। 

मदरसों के 34 हजार छात्रों को मिलेगा मध्यान्ह भोजन :- जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि कैबिनेट ने गैर अनुदान प्राप्त मदरसों में भी मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इससे इनमें पढ़ने वाले 34 हजार 250 छात्रों को मध्यान्ह भोजन मिलेगा। इस व्यवस्था से सरकार पर दस करोड़ रुपए से अधिक का सालाना वित्तीय भार आएगा। प्रदेश में दो हजार 406 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। अभी 1375 मदरसों में मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है। बैठक में यह भी तय किया गया कि उन मदरसों को ही योजना में लिया जाएगा, जिनकी मान्यता के लिए सिफारिश केंद्र सरकार से की गई है या फिर की जाएगी। 
मिलावट के खिलाफ चलेगा शुद्ध के लिए युद्ध  :- बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध के अलावा भी खाद्य वस्तुओं में मिलावट है। मसालों में तो बहुत मिलावट है। इसके खिलाफ भी सख्ती के साथ कार्रवाई करनी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को जो अधिकार चाहिए वे दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री तरुण भनोत ने कहा कि शिकायतकर्ता की शिकायत पर कोई पकड़ा जाए तो उसे सम्मानित किया जाना चाहिए। शिकायत के लिए हेल्पलाइन 104 है। सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह इस अभियान को 'शुद्ध के लिए युद्ध" का नारा दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने मिलावट के मामलों में की गई कार्रवाई की जानकारी दी। मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लेकर बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट को बधाई दी गई। 
सीधी भर्ती में अधिकतम आयुसीमा 40 साल की :- कैबिनेट ने सरकार के उस फैसले पर भी मुहर लगा दी, जिसमें सीधी भर्ती के पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 साल तय की गई है। यह आयु सीमा प्रदेश और अन्य राज्य के आवेदकों के लिए समान रहेगी। अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, नगर सैनिक, निगम, मंडल, प्राधिकरण के कर्मचारियों को आयुसीमा में पांच साल की छूट रहेगी। जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि प्रदेश के युवाओं के हितों को देखते हुए यह प्रावधान रखा गया है कि आवेदक का मध्यप्रदेश के रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन होना चाहिए।

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