शकर निर्यात बढ़ाना बड़ी चुनौती, पिछले दो वर्षों से निर्यात का लक्ष्य हासिल नहीं - .

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Saturday, 31 August 2019

शकर निर्यात बढ़ाना बड़ी चुनौती, पिछले दो वर्षों से निर्यात का लक्ष्य हासिल नहीं

शकर निर्यात बढ़ाना बड़ी चुनौती, पिछले दो वर्षों से निर्यात का लक्ष्य हासिल नहीं

सरकार के लिए शकर का निर्यात बढ़ाना बड़ी चुनौती साबित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव भारतीय बाजार के मुकाबले 700-800 रुपए प्रति क्विंटल कम होने से सबसिडी और कोटा बढ़ाने जैसे कदम बेअसर हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय शकर महंगी होने के चलते पिछले दो वर्षों से निर्यात का लक्ष्य हासिल नहीं हो पा रहा है। पिछले दो वर्ष से अधिक उत्पादन के कारण मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया बढ़ता गया। इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकार ने शकर निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिसके हासिल होने की संभावना कम है। पर्याप्त सबसिडी के बावजूद शकर निर्यात बढ़ाने में सफलता नहीं मिल रही है। शकर उद्योग से जुड़े सभी संगठन निर्यात, खास तौर पर कच्ची शकर के निर्यात पर जोर दे रहे हैं। कुछ संगठन 70 लाख टन निर्यात और लगभग 9 हजार करोड़ रुपए की सबसिडी मांग कर रहे हैं, ताकि गन्ना किसानों का बकाया चुकाया जा सके।
पाकिस्तान ने बढ़ाई मुश्किल :-  ब्राजील के साथ ही पकिस्तान भी भारत को शकर बाजार में चुनौती दे रहा है। पाकिस्तान काफी कम भाव पर बांग्लादेश और मलेशिया को शकर निर्यात कर रहा है। इसके कारण एशियाई देशों को भारत से शकर निर्यात घटा है। भारत ने श्रीलंका को निर्यात बढ़ाया है, लेकिन चीन को 20 लाख टन शकर निर्यात की बातचीत कागजो तक सिमट गई।
नए बाजार की तलाश :- सरकार पिछले कुछ समय से दक्षिण कोरिया और अफ्रीकी देशों को शकर निर्यात की संभावना तलाश रही है। भारत का प्रयास इन देशों के साथ भी ईरान की तरह वस्तु विनिमय जैसे किसी करार के जरिए शकर निर्यात करने का है। इससे भारत को डब्लूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) में सबसिडी से संबंधित शिकायतों से छुटकारा मिल जाएगा। ब्राजील ने पिछले साल भारत सरकार की तरफ से दी गई सबसिडी का मामला डब्लूटीओ में उठाया था। फिलहाल इन नियमों को साल 2022 तक मानने की बाध्यता के चलते सरकार काफी सतर्कता बरत रही है।
उत्पादन और स्टॉक अधिक :- पिछले दो वर्षों से शकर का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन हो रहा है। इसके कारण स्टॉक बढ़ता जा रहा है। सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर 2020 से शुरू होने वाला नया शकर सत्र 160 लाख टन से अधिक स्टॉक के साथ शुरू होगा। इसमें से 60 लाख टन रिजर्व रखने के बावजूद मिलों के पास करीब 100 लाख टन का कैरिओवर स्टॉक बचेगा। ऐसे में शकर सत्र 2019-20 में 280 लाख टन अनुमानित उत्पादन के साथ शकर की उपलब्धता रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान है। देश में शकर की सालाना खपत करीब 250 लाख टन है, जबकि 2017-18 में 350 लाख टन और 2018-19 में 320 लाख टन शकर का उत्पादन हुआ है।

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