अगर घर अपना है तो बुढ़ापे में पा सकते हैं रेगुलर पेंशन, जानिए क्‍या है इसका प्रोसेस - .

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Thursday, 8 August 2019

अगर घर अपना है तो बुढ़ापे में पा सकते हैं रेगुलर पेंशन, जानिए क्‍या है इसका प्रोसेस

अगर घर अपना है तो बुढ़ापे में पा सकते हैं रेगुलर पेंशन, जानिए क्‍या है इसका प्रोसेस

कई दफे वरिष्ठ नागरिकों को यह सलाह दी जाती है कि वह नियमित आय के लिए रिवर्स मोर्गेज का इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि वरिष्ठ नागरिक के पास कई बार आगे के जीवन-यापन के लिए पैसे नहीं होते हैं। इसलिए उनके लिए रिवर्स मोर्गेज बेहतर आप्शन साबित होता है। इसे एक उदहारण के जरिए समझे। 65 वर्षीय तुषार मेहता अपनी पत्नी के निधने के बाद इंदौर में अकेले रहते हैं। उनकी बेटी की शादी हो गई है और वह देश से बाहर रहती हैं। उनका बेटा दिल्ली में रहता है और वह इंदौर अपने पिता के पास आकर नहीं शिफ्ट होना चाहता। पिता भी अपने जीवन के बाकी दिन इंदौर में ही बीताना चाहते हैं। मेहता दिल के मरीज हैं और उन्हें अपने दवाई पर महीनों में बहुत ज्यादा खर्च करने होते हैं। हालांकि उन्हें पेंशन भी मिलता है लेकिन वे उससे संतुष्ट नहीं हैं। उनके दोस्त ने सुझाया कि वे रिवर्स मोर्गेज ले लें।

क्या है रिवर्स मोर्गेज :- रिवर्स मोर्गेज के जरिये मेहता अपने घर को गिरवी रखकर उसपर हर महीने नियमित आय पा सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि उनके घर का मालिकाना हक भी नहीं बदलेगा और घर उनके नाम ही रहेगी और नियमित आय भी बनता रहेगा। रिवर्स मोर्गेज होम लोन के उल्ट सुविधा है। होम लोन में आप घर खरीदकर उसका ईएमआई भरते हैं और रिवर्स मोर्गेज में आप अपना घर गिरवी रख उसके बदले पैसे पाते हैं।
मेहता को आय के एक नियमित प्रवाह के बदले में कर्जदाता को अपने घर का अधिकार गिरवी रखना होगा। उसकी संपत्ति, वर्तमान संपत्ति की कीमतों और घर की स्थिति की मांग के आधार पर कर्जदाता एक कर्ज राशि, आमतौर पर संपत्ति के मूल्य का लगभग 60%, एकमुश्त या आवधिक भुगतान के रूप में देगा। आवधिक भुगतान जिसे रिवर्स ईएमआई के रूप में भी जाना जाता है, एक निश्चित कार्यकाल (अधिकतम 15 वर्ष) से अधिक का भुगतान किया जाएगा। कार्यकाल के अंत में आय रुक जाएगी लेकिन मेहता मृत्यु तक घर पर अपना कब्जा कर सकते हैं। जब तक वह जिंदा हैं तब तक किसी भी पुनर्भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी। रिवर्स मोर्गेज लोन या तो तब मिलेगा जब मेहता की मृत्यु हो जाएगी या वे घर बेचने का फैसला करेंगे। उनकी मृत्यु पर, उनके बच्चों के पास कर्ज का भुगतान करने और घर को पुनः प्राप्त करने या कर्जदाता को संपत्ति पर कब्जा करने का विकल्प होगा।

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