37 साल बाद कानून बनाकर आदिवासियों को कर्जमाफी देगी कमलनाथ सरकार - .

Breaking

Wednesday, 14 August 2019

37 साल बाद कानून बनाकर आदिवासियों को कर्जमाफी देगी कमलनाथ सरकार

37 साल बाद कानून बनाकर आदिवासियों को कर्जमाफी देगी कमलनाथ सरकार

कमलनाथ सरकार 37 साल बाद कानून बनाकर आदिवासियों द्वारा गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिए कर्ज को माफ करेगी। वर्ष 1982 में इस तरह का कानून एक बार के लिए लाया गया था। यही प्रक्रिया अब अपनाई जा रही है। इसके लिए राजस्व विभाग ने मसौदा बनाकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया है। साथ ही सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में ब्याज की दर तय करने का अधिकार अपने हाथ में लेगी। इसके लिए साहूकारी अधिनियम में अध्यादेश के जरिए बदलाव किया जाएगा। विधानसभा के शीतकालन सत्र में इन बदलावों के लिए संशोधन विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। 
प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों (89 आदिवासी विकासखंड) में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के ऊपर गैर लाइसेंसी साहूकारों ने ब्याज पर जो कर्ज (15 अगस्त 2019 तक) दिया, वो माफ होगा। इसके लिए अनूसूचित जनजाति साहूकार विनियम 1972 में नई धारा जोड़ी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए अध्यादेश मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेज दिया गया है। इसके लागू होने पर बिना लाइसेंसधारी द्वारा ब्याज पर जो भी राशि दी गई है वो शून्य हो जाएगी। यदि इसकी वसूली के लिए जोर-जबरदस्ती की जाती है तो वो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा।
दोष सिद्ध होने पर तीन साल की सजा और एक लाख रुपए तक जुर्माना लगेगा। अभी तक गैरकानूनी तरीके से ब्याज का धंधा करने पर छह माह की सजा और एक हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान था। इसके साथ ही लाइसेंस देने का अधिकार एसडीएम (अनुविभागीय अधिकारी राजस्व) के पास रहेगा। ब्याज की दर भी राज्य सरकार तय करेगी। मौजूदा प्रावधान सात से लेकर 12 फीसदी तक ब्याज दर लिए जाने का है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि राजस्व महकमे के पास मौजूद जानकारी के हिसाब से प्रदेश में आज की स्थिति में अनुसूचित क्षेत्रों में एक भी साहूकारी लाइसेंस क्रियाशील नहीं है। लाइसेंस की अवधि एक साल रहती है और इसका नवीनीकरण कराना होता है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्रों के जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के ऊपर चढ़े कर्ज को माफ करने के लिए नया कानून लाया जा रहा है। इसमें 15 अगस्त 2019 तक गैरकानूनी तरीके से दिया कर्ज शून्य घोषित हो जाएगा। 1975 और 1982 में तत्कालीन सरकारें एक बार के लिए इस तरह का प्रावधान कर चुकी हैं।  इस अधिनियम के प्रभावी होने के बाद न तो कर्ज की वसूली के लिए दबाव बन सकेगा और न ही लेनदार के ऊपर कोई बाध्यता होगी। यदि कोई जबरदस्ती करता है तो एसडीएम के यहां शिकायत करने पर तत्काल कार्रवाई होगी। इसके अतिरिक्त यदि कोई व्यक्ति यह शिकायत करता है कि किसी व्यक्ति ने कर्ज के एवज में चल या अचल संपत्ति गिरवी रखी है तो उसकी भी वापसी कराई जाएगी। इसे न देने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।

No comments:

Post a Comment

Pages