21 अगस्त से मध्यप्रदेश में फिर शुरू होगी तेज बारिश, अभी ऐसा है मौसम का हाल - .

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Sunday, 18 August 2019

21 अगस्त से मध्यप्रदेश में फिर शुरू होगी तेज बारिश, अभी ऐसा है मौसम का हाल

Madhya Pradesh Weather Alert : 21 अगस्त से मध्यप्रदेश में फिर शुरू होगी तेज बारिश, अभी ऐसा है मौसम का हाल

मध्यप्रदेश के कई इलाकों में रुक-रुककर हल्की बारिश का दौर जारी है, लेकिन एक बार फिर पूरे प्रदेश में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विशेषज्ञ उदय सरवटे के अनुसार 19 अगस्त तक बंगाल की खाड़ी में एक सिस्टम सक्रिय होने वाला है। इसके असर से 21 अगस्त के बाद भोपाल सहित प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होगा। यह सिलसिला 25-26 अगस्त तक चल सकता है। तब तक कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है।
भोपाल में शनिवार का मौसम बदला हुआ रहा। सुबह से चटक धूप खिली, फिर बादलों ने आसमान घेर लिया। दोपहर में हल्की बौछारें पड़ीं तो देर शाम तेज बौछारों गिरीं। मौसम विशेषज्ञ सरवटे के मुताबिक फिलहाल बारिश की गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन एक बार फिर अच्छी बारिश मिलने वाली है। इसके लिए रविवार रात से बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर बनने वाला है, जो सोमवार तक तैयार हो जाएगा। इससे 20-21 अगस्त से मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। इधर, बारिश में कमी आने से तापमान भी बढ़ा है। अधिकतम तापमान में 1.2 डिग्री का उछाल आया। 30 डिग्री सेल्सियस पर शनिवार को अधिकतम तापमान पहुंच गया जो कि सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यनूतम तापमान 23.2 डिग्री रिकार्ड किया गया। 

218 मिलीमीटर बारिश की जरूरत : मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में औसत से 17 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। भोपाल में 72 फीसदी ज्यादा बारिश रिकार्ड की गई है। इधर, 30 जून से 30 सितंबर तक प्रदेश में औसत बारिश 952 मिमी होती है, इसमें से 734 मिमी बारिश हो चुकी है। कोटा पूरा होने के लिए 218 मिमी बारिश की जरूरत है।
चंबल क्षेत्र में 40 गांव बाढ़ से घिरे, 500 लोगों को रेस्क्यू कर निकाला :- कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से मुरैना और भिंड में चंबल अपने रौद्र रूप में आ गई। मुरैना स्थित राजघाट पुल पर चंबल खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर बह रही है। राजघाट पुल पर खतरे का निशान 138 मीटर पर है और वर्तमान में जल स्तर 140.50 मीटर है। ऐसे में चंबल किनारे के करीब 40 गांव पानी से घिर गए। 7 गांवों की स्थिति ज्यादा खराब होने पर प्रशासन ने रेस्क्यू चलवाकर 500 के करीब लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया।
वहीं भिंड के बरही चंबल पुल पर 23 साल बाद नदी खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर बह रही है। चंबल नदी में साल 1996 में 128.40 मीटर तक पानी बहा था। यहां खतरे का निशान 122 मीटर पर है। चंबल नदी में आए उफान के बाद अटेर और फूफ के 21 गांवों में बाढ़ के हालात हैं। अटेर में 11 गांवों का रास्ता सड़क मार्ग से पूरी तरह से कट चुका है। वहीं दतिया के सेंवढ़ा के सनकुआं धाम में बने छोटे पुल के करीब 2 फीट ऊपर पानी बह रहा है, जिससे मंदिर परिसर में भी पानी भर गया।

ओंकारेश्वर में घाट जलमग्न, श्रद्धालुओं के जाने पर प्रतिबंध :- ओंकारेश्वर बांध लबालब होने पर शनिवार को 23 में से 14 गेट ढाई मीटर तक खोलकर 4350 क्यूमेक्स और आठ टरबाइन से 1920 क्यूमेक्स पानी नर्मदा में छोड़ा गया। इससे नर्मदा न्यूनतम जलस्तर से करीबन 15 फीट ऊपर बहने लगी। सभी घाट जलमग्न हो गए। इसी तरह इंदिरा सागर बांध के 12 गेट एक-एक मीटर खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

प्रशासन ने नर्मदा किनारे के रहवासियों को ऊंचे स्थानों पर जाने की समझाइश दी है। शुक्रवार को इंदिरा सागर बांध के बाद ओंकारेश्वर बांध के पांच गेट खोले गए थे। प्रशासन ने भी घाटों पर स्नान पर प्रतिबंध लगा दिया है। घाटों पर पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए हैं। विहंगम दृश्य को कई लोगों ने कैमरे में कैद किया।

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