दुबई से ट्रिक सीखकर आया और यूपीआई लिंक भेजकर ऐसे उड़ाता था पैसे - .

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Wednesday, 24 July 2019

दुबई से ट्रिक सीखकर आया और यूपीआई लिंक भेजकर ऐसे उड़ाता था पैसे

दुबई से ट्रिक सीखकर आया और यूपीआई लिंक भेजकर ऐसे उड़ाता था पैसे

ग्वालियर रेंज की साइबर सेल पुलिस ने ठगी कर खाते से ई-वॉलेट में ट्रांसफर हुई राशि को ब्लॉक करने का रास्ता निकाला तो साइबर अपराधियों ने ठगी करने का नया रास्ता खोज लिया। ठगों ने यूपीआई लिंक भेजकर स्टूडियो संचालक शंकर कुशवाह के खाते से 6 हजार रुपए निकाल लिए। पड़ताल करने पर पता चला कि 6 हजार रुपए ई-वॉलेट में ट्रांसफर नहीं हुए। अब साइबर क्राइम एक्सपर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आखिर फिर यह राशि कहां गई। जब पुलिस ने गहनता से जांच की तो पता चला कि शातिर ठगों ने ठगी का नया रास्ता खोज निकाला है। ठगों ने ई-वॉलेट में राशि ट्रांसफर करने की बजाए गिफ्ट वाउचर (गिफ्ट कार्ड) खरीद लिए हैं। 

इन गिफ्ट कार्डों का उपयोग बांड की तरह किया जा सकता है और इससे खरीदारी के साथ नगद राशि का भुगतान भी लिया जा सकता है। यह गिफ्ट वाउचर आपके पॉकेट में नहीं मोबाइल में सेफ रखे जा सकते हैं। इस नए तरीके से ठगी करने वाले मुकेश राठौर को पुलिस ने गिफ्तार कर लिया है। आरोपी यह ट्रिक दुबई से सीखकर आया था और 7 दिन में न्यूजीलैंड जाने वाला था। साइबर सेल एसपी सुधीर अग्रवाल ने बताया कि स्टूडियो संचालक शंकर कुशवाह ने शिकायत कर बताया कि एक अनजान व्यक्ति ने कॉल कर उससे संपर्क किया। फोन करने वाले युवक ने बताया कि उसे एक एलबम बनवानी है। 6 हजार में एलबम बनाने के लिए शंकर तैयार हो गया। अनजान युवक ने बताया कि वह भुगतान इंटरनेट के जरिए खाते में करेगा इसके लिए शंकर तैयार हो गया। 

यूपीआई लिंक पर क्लिक करते ही खाते से निकल गए 6 हजार रुपए :- शंकर कुशवाह ने पुलिस को बताया कि ई-भुगतान लेने के लिए उसने ग्राहक द्वारा भेजी गई लिंक पर क्लिक किया और ऑप्शन आने पर अपना पासवार्ड डाल दिया। इसके बाद उसके खाते से 6 हजार रुपए निकल गए, उसकी कुछ समझ में नहीं आया। साइबर सेल के एक्सपर्ट ने इसे आसान मामला समझा, उन्हें लगा कि यह राशि किसी ई-वॉलेट में ट्रांसफर हुई होगी। लेकिन जांच में आगे बढ़ते की उनका सिर चकरा गया, क्योंकि यह राशि किसी ई-वॉलेट में ट्रांसफर नहीं हुई थी। 

अब सवाल था कि ठग शंकर कुशवाह के खाते से निकाली गई राशि को कहां ले गया? इसके बाद साइबर एसपी सुधीर अग्रवाल ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए टीआई मुकेश नारोलिया, एएसआई राजेश बाबू राठौर, प्रधान आरक्षक पवन शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह यादव, रमन त्रिपाठी, भावना बाथम की टीम गठित की। इस टीम ने सबसे पहले खाते से हुए ट्रांजेक्शन का पता लगाने के लिए बैंक से शंकर के खाते का स्टेटमेंट मांगा। स्टेटमेंट में सिर्फ यूपीआई लिखकर आया। इसके बाद टीम ने जांच की तो पता चला कि शंकर के खाते निकले 6 हजार रुपए से गिफ्ट बाउचर खरीदे गए हैं। पड़ताल में सामने आया कि ठगी को मुरार घासमंडी में हरदेव के टाल के पीछे रहने वाले मुकेश पुत्र भगवान सिंह राठौर ने अंजाम दिया है।
ऐसे करते थे ठगी :- कॉल करने से पहले ठग व्यवसाय से जुड़ी जानकारी जुटाकर कॉल लगाते थे। फिर एडवांस देने के बहाने यूपीआई के माध्यम से लिंक (फोन-पे, गुगल-पे व पेटीएम ) भेजते थे। लिंक पर क्लिक करते पर ही यूपीआई, आईडी, पासवर्ड व पे के ऑप्शन दबाने पर खाते से रुपए निकाल जाते थे। साइबर पुलिस की नजरों से बचने के लिए ठग ई-वॉलेट में राशि ट्रांसफर करने की बजाए गिफ्ट वाउचर खरीद लेते थे और कुछ समय बाद वॉलेट से अपलोड करने के बाद उसका उपयोग कर लेते थे।
बांड की तरह गिफ्ट कार्ड या वाउचर :- विभिन्न कंपनियों के बाजार में आए गिफ्ट कार्ड या बाउचर, बांड की तरह हैं। इसे मोबाइल में पासवर्ड डालकर सेव किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर इन गिफ्ट कार्ड से खरीदारी की जा सकती है और कार्ड की कीमत की राशि भी ली जा सकती है।
दुबई से सीखकर आया था ट्रिक :- शातिर ठग मुकेश पुत्र भगवान सिंह राठौर को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जॉब की तलाश में दुबई गया था। जहां उसने ठगी का यह नया तरीका सीखा। ट्रिक सीखने के लिए आरोपी डेढ़ माह दुबई में रहा। मुकेश अगले सप्ताह न्यूजीलैंड जाने वाला था, लेकिन उससे पहले ही वह पकड़ में आ गया। बताया गया है कि आरोपी के वाटर प्लांट भी हैं। आरोपी को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
जांच में यह हुआ खुलासा
- आरोपी के तार कई राज्यों के ठगों से जुड़े हैं।
- यूपीआई और गिफ्ट कार्ड का एक साथ प्रयोग कर ठगी की जाती थी।
- ठगी करने के लिए जस्ट डायल के माध्यम से लोगों के निकलते थे नंबर।
- पुलिस को गुमराह करने के लिए अलग-अलग राज्यों से कॉल व ट्रांजेक्शन करते थे।
- ठगी करने के लिए खुद को इंडियन आर्मी के नाम से ट्रू कॉलर पर रजिस्टर्ड कर रखा था। जिससे लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाएं।

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