रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाएगी कमलनाथ सरकार - .

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Monday, 8 July 2019

रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाएगी कमलनाथ सरकार

रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाएगी कमलनाथ सरकार

रातापानी वन्यजीव अभयारण्य को कमलनाथ सरकार टाइगर रिजर्व बनाएगी। इसका प्रस्ताव नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) को भेजा जा रहा है। इसे लेकर वन मंत्री उमंग सिंघार ने शुक्रवार शाम एनटीसीए के सदस्य सचिव डॉ. अनूप नायक से बातचीत की है। सिंघार ने कहा कि उनकी सरकार अभयारण्य को रिजर्व बनाने के लिए तैयार है। इस पर डॉ. नायक ने मंत्री से कहा है कि अभयारण्य को रिजर्व बनाया जा सकता है। एनटीसीए विधिवत प्रस्ताव मिलने के बाद दोबारा सभी मापदंडों पर जांच करेगा। रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की कवायद 11 साल पहले साल 2007-08 से चल रही है। तब एनटीसीए ने रिजर्व बनाने के लिए सैद्घांति अनुमति भी दे दी थी, लेकिन भाजपा की तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान ने इससे इंकार कर दिया था।
एनटीसीए व नेशनल जूं अथॉरिटी के सदस्य सचिव डॉ. अनूप नायक दो दिवसीय दौरे पर अपनी टीम के साथ मप्र आए हैं। वे शुक्रवार रातापानी वन्यजीव अभयारण्य गए थे। दोपहर से शाम तक अभयारण्य देखा, सभी प्रकार की जानकारी ली और शाम को वनमंत्री उमंग सिंघार से मुलाकात की। रातापानी को रिजर्व बनाने को लेकर दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई है। इसमें मंत्री ने सरकार की तरफ से एनटीसीए के सदस्य सचिव को बता दिया है कि उनकी सरकार पूरी तरह तैयार है और जल्द काम शुरू किया जाए।

11 साल पहले भेजा था प्रस्ताव, पलट गई थी सरकार :-  रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डॉ. पीबी गंगोपाध्याय ने वर्ष 2007-08 में भेजा था। तब प्रस्ताव से राज्य सरकार सहमत थी और एनटीसीए ने प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की सैद्घांतिक स्वीकृति दे दी थी। इतना ही नहीं, एनटीसीए ने इसे टाइगर रिजर्व की सूची में भी शामिल कर लिया था और राज्य सरकार को नोटिफिकेशन जारी करने को कहा था। इसकी भनक लगते ही खनन माफिया सक्रिय हुए और इसके बाद सरकार का भी मन बदल गया, क्योंकि टाइगर रिजर्व घोषित होते ही रातापानी की सीमा के अंदर और बाहर खनन नहीं किया जा सकता था। बता दें कि वन्यप्राणी विशेषज्ञ बाघों के रहवास स्थल के रूप में रातापानी के जंगल को कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व से भी बेहतर बताते रहे हैं। रातापानी में बाघों की संख्या वर्तमान में 40 से ज्यादा बताई जा रही है। वहीं तेंदुए 100 करीब हैं।

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