पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड करना बंद किया तो सरकार को लगी ढाई सौ करोड़ की चपत - .

Breaking

Sunday, 7 July 2019

पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड करना बंद किया तो सरकार को लगी ढाई सौ करोड़ की चपत

पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड करना बंद किया तो सरकार को लगी ढाई सौ करोड़ की चपत

 नगरीय क्षेत्रों में पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड करने का प्रावधान समाप्त करने से सरकार को सालाना ढाई सौ करोड़ रुपए की चपत लग रही है। शिवराज सरकार ने 2018 में भू-राजस्व संहिता में संशोधन कर इस व्यवस्था को खत्म कर दिया था। जबकि इसकी शुरुआत भी उन्हीं की सरकार में हुई थी।
भोपाल सहित कुछ जगहों पर लोगों ने इसका फायदा उठाते हुए पट्टे की जमीन को फ्री-होल्ड करा लिया। खजाने को भरने के जतन में जुटे वित्त विभाग ने जब राजस्व विभाग के जरिए होने वाली आय की पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि सिर्फ एक प्रावधान के खत्म होने से करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की चपत सालाना लग रही है। विभागीय मंत्री तरुण भनोत ने इसे लेकर नोटशीट लिखी, जिस पर सरकार ने भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष इंद्रनील शंकर दाणी की अध्यक्षता में समिति बना दी। समिति भू-राजस्व संहिता में हुए संशोधन और नए नियमों को मसौदा बनाकर सरकार को देगी।
प्रदेश में नगरीय क्षेत्र में सरकार ने हाउसिंग सोसायटी और व्यक्तिगत तौर पर बड़े पैमाने पर जमीन पट्टे पर दी है। अधिकांश मामलों में 30 साल में पट्टे का नवीनीकरण कराना होता है। इस झंझट से मुक्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2010 में भू-राजस्व संहिता में जमीन को एक निश्चित शुल्क देकर फ्री-होल्ड करने का प्रावधान किया था। हालांकि, इसका शुल्क काफी अधिक था। इसके बावजूद भोपाल में अरेरा कॉलोनी सहित कई जगह लोगों ने जमीन को फ्री-होल्ड कराया। फीस घटाने को लेकर मांग उठी तो मामले का परीक्षण कर फीस कम कर दी गई, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2018 में शिवराज सरकार ने भू-राजस्व संहिता में संशोधन कर धारा 181(क) में बदलाव कर दिया। इसके तहत संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के बाद जमीन को फ्री-होल्ड कराने का अधिकार नहीं रहेगा।
सूत्रों के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों में जमीन को फ्री-होल्ड कराने का प्रावधान है। इससे सरकार को निश्चित आय भी होती है। यही वजह है कि जब वित्त विभाग ने राजस्व विभाग के जरिए होने वाली आय की समीक्षा की तो पाया कि फ्री-होल्ड का प्रावधान खत्म होने से सालाना करीब ढाई सौ करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इसके चलते वित्त मंत्री तरुण भनोत ने मई 2019 में नोटशीट लिखकर राजस्व स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए विभाग को परीक्षण करने के लिए कहा। लगभग डेढ़ माह मंथन करने के बाद राजस्व विभाग ने भू-राजस्व संहिता में किए गए संशोधनों को नए सिरे से दिखाने के लिए भूमि सुधार आयोग के अध्यक्ष इंद्रनील शंकर दाणी की अध्यक्षता में समिति बना दी। समिति नियमों का परीक्षण करने के साथ नए नियम भी प्रस्तावित करेगी। 
नरसिंहपुर में आवेदन मिले तो खुला मामला :- वित्तमंत्री के प्रभार का जिला नरसिंहपुर है। वे जब वहां दौरे पर गए तो कई लोगों ने उन्हें पट्टे की जमीन फ्री-होल्ड करने का प्रावधान खत्म होने से हो रही परेशानियां बताईं। साथ ही मांग उठाई कि इस प्रावधान को फिर लागू किया जाए। इससे सरकार को राजस्व भी मिलेगा।
फ्री-होल्ड से यह फायदा :- पट्टे की जमीन के फ्री-होल्ड होने से उस पर काबिज व्यक्ति को भूमि स्वामी का अधिकार मिल जाएगा। अभी वह पट्टाधारक है और उसे 30 साल बाद पट्टे का नवीनीकरण कराना होता है। सामान्यत: इसमें लोग लापरवाही बरतते हैं और विलंब करते हैं। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी होता है। 
लीज नवीनीकरण भी उलझन में :- उधर, गृह निर्माण समिति, विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड सहित अन्य संस्थाओं को आवासीय योजनाओं के लिए दी गई जमीनों के लीज नवीनीकरण के मामले भी बड़ी तादाद में उलझे हैं। दरअसल, आवासीय उद्देश्य से दी गई जमीन के आंशिक भाग में वाणिज्यिक उपयोग होने के कारण नवीनीकरण रोक दिया। मध्य रेलवे गृह निर्माण समिति, रचना नगर, आराधना नगर सहित कई हाउसिंग सोसायटी की लीज के नवीनीकरण के प्रकरण कलेक्टर कार्यालय में चार-पांच साल से लंबित हैं।


No comments:

Post a Comment

Pages