महाकाल मंदिर में करोड़ों के निर्माण कार्यों पर सवाल, बारिश में श्रद्धालु परेशान - .

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Sunday, 7 July 2019

महाकाल मंदिर में करोड़ों के निर्माण कार्यों पर सवाल, बारिश में श्रद्धालु परेशान

महाकाल मंदिर में करोड़ों के निर्माण कार्यों पर सवाल, बारिश में श्रद्धालु परेशान

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में मानसून की शुरुआती बारिश ने ही बीते कुछ वर्षों में हुए निर्माण और संधारण के कामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए नंदी हॉल व यज्ञ शाला की छत से पानी टपक रहा है। तिलक प्रसाद काउंटर के छत से पानी टपकने की समस्या पुरानी है। मंदिर प्रशासन इसका भी हल नहीं निकाल पाया है। जगह-जगह छत से टपकते पानी के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। मामले में उज्जैन विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री केसी पाटीदार का कहना है कि निर्माण गुणवत्तापूर्ण है। फिर भी कहीं कोई परेशानी आ रही है, तो उसका निराकरण किया जाएगा।

दो करोड़ की लागत से हुआ नंदी हॉल का विस्तार  :- महाकाल मंदिर समिति ने सिंहस्थ 2016 में करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से नंदी हॉल का विस्तार कराया था। उज्जैन विकास प्राधिकरण को निर्माण कार्य का जिम्मा सौंपा गया था। बारिश में नवनिर्मित हॉल की छत से पानी टपक ने लगा है। हॉल में नीचे मार्बल लगा हुआ है। लगातार पानी गिरने से फिसलन हो गई है। इससे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। हालांकि समस्या के निराकरण के लिए मंदिर प्रशासन ने मेटिन बिछा दी है। लेकिन श्रद्धालु निर्माण को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

हवन कुंड में टपक रहा पानी :- जूना महाकाल मंदिर परिसर में निर्माण एजेंसी उविप्रा ने करीब 40 लाख रुपए की लागत से पौराणिक स्वरूप की नई यज्ञशाला का निर्माण किया है। पुजारी प्रदीप गुरु के यजमान ने इसके लिए राशि भेंट की थी। यज्ञशाला का काम पूरा हुए छह माह भी नहीं बीते हैं। मगर वर्षा शुरू होते ही यज्ञशाला की छत भी टपक रही है। चार दिन पहले कोलकाता से आए श्रद्धालुओं ने यहां यज्ञ कराया था। उस दौरान भी हल्की बूंदाबांदी में छत से पानी आने लगा था। एक हवन कुंड में पानी टपकने से परेशान भक्तों ने यज्ञ शाला की छत पर तिरपाल ढंकवाया था।

यहां सालों से समस्या  :-  नंदी हॉल के निर्गम रैंप पर स्थित तिलक प्रसाद काउंटर की छत वर्षों से टपक रही है। इस बार भी दो दिन की बारिश ने यहां कर्मचारियों का बैठना मुहाल कर दिया है। लगातार पानी के रिसाव से काउंटर पर प्रसाद का कटोरा रखने तक में परेशानी आ रही है। मंदिर में काम करने वाले लोनिवि, उविप्रा आदि विभागों के एक्सपर्ट भी इस समस्या को हल नहीं कर पा रहे हैं।

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