मध्यप्रदेश में अवैध खनन जोरों पर, 'सोना' बनी अवैध रेत - .

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Sunday, 2 June 2019

मध्यप्रदेश में अवैध खनन जोरों पर, 'सोना' बनी अवैध रेत

मध्यप्रदेश में अवैध खनन जोरों पर, 'सोना' बनी अवैध रेत

मध्यप्रदेश में रेत का खनन जितना कानूनी तरीके से नहीं हुआ, उससे कहीं अधिक अवैध तरीके से निकालकर ठेकेदारों ने मुनाफा कमाया। निर्माण कार्य बढ़ने की वजह से इसकी मांग बढ़ी तो ठेकेदारों ने आपूर्ति तो बढ़ा दी पर इसका फायदा न तो सरकार को हुआ और न ही आम आदमी को। मुनाफा सिर्फ और सिर्फ ठेकेदारों ने कमाया। शिवराज सरकार ने ठेकेदारों का दखल कम करने के नाम पर पंचायतों को खदानें सौंप दी पर इससे न तो पंचायत की आर्थिक सेहत सुधरी और न ही अवैध उत्खनन रुका। दो साल पहले रेत से खनिज निगम को करीब 250 करोड़ रुपए राजस्व मिला तो पिछले साल यह घटकर 69 करोड़ रुपए रह गया। ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी वो अलग। ऐसे में अंधाधुंध खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान की तो चर्चा ही बेमानी है।
भरपूर मांग, लागत कम और अथाह मुनाफा होने की वजह से अवैध रेत कारोबार से सोने जितनी कमाई हो रही है। सूबे में बीते एक-दो दशक में निर्माण कार्य बहुत बढ़ गए हैं। सरकारों का फोकस भी अधोसंरचना निर्माण पर ज्यादा रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण या शहरी आवास योजना हो या फिर सड़क, पुल-पुलिया या फिर भवन निर्माण, सबमें रेत की दरकार होती है। मध्य प्रदेश में रेत का सबसे बड़ा स्रोत नर्मदा नदी से लगी रेत खदानें हैं। कुछ समय पहले तक खदानों पर बड़ी-बड़ी कंपनियों का कब्जा रहता था। रेत की मांग को पूरा करने के लिए ठेकेदारों ने पोकलेन मशीन तक का उपयोग किया।

हालात यह हो गए कि कई जगह नदी के बीचों-बीच मशीनें लगाकर रेत निकाली जाने लगी। इससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए जब विरोध में आवाज उठी तो सरकार ने पहले नर्मदा नदी से लगी खदानों में मशीनों पर प्रतिबंध लगाया और फिर खदानें नीलाम करने की जगह पंचायतों को देने की नीति लागू कर दी। इसके पीछे मंशा जो भी रही हो पर यह मॉडल फेल हो गया। पंचायतों पर दबाव बनाकर दबंग ठेकेदारों ने मनमर्जी से उत्खनन किया और रॉयल्टी की जमकर चोरी भी की। एक प्रकार से देखा जाए तो भले ही खदानों का संचालन पंचायतों को दिया गया था लेकिन इन्हें चला ठेकेदार ही रहे थे। नाममात्र की लागत पर कैसे मुनाफा कमाया जाता है इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि कुछ सैकड़ा खर्च कर सामान्यत: एक ट्रक रेत 18 से लेकर 30 हजार रुपए तक मिलती है।
इस तरह अवैध रेत उत्खनन थोड़े जोखिम, कानून की ज्यादा अनदेखी और सेटिंग से बेहिसाब मुनाफे का काला कारोबार साबित हो रहा है। उधर, राजस्व के साथ ही इस अवैध खनन ने पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। जल विज्ञानियों की मानें तो रेत नदियों की जान है। मशीनों से बेतहाशा उत्खनन से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हुआ बल्कि नदियों का प्रवाह और जीवन संकट में आ गया। नर्मदा नदी कई जगह कुंडों में तब्दील हो गई है। जिन नदियों में पहले कभी गंदा पानी नहीं होता था वहां अब तटों पर कीचड़ ही कीचड़ होने लगी है।

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