इस नक्षत्र में नरेंद्र मोदी लेंगे शपथ, सौभाग्य योग भारत को बनाएगा विश्वगुरु - .

Breaking

Thursday, 30 May 2019

इस नक्षत्र में नरेंद्र मोदी लेंगे शपथ, सौभाग्य योग भारत को बनाएगा विश्वगुरु

PM Modi Oath Ceremony : इस नक्षत्र में नरेंद्र मोदी लेंगे शपथ, सौभाग्य योग भारत को बनाएगा विश्वगुरु

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा अचला एकादशी को रेवती नक्षत्र में 30 मई को प्रधानमंत्री पद की दूसरी बार शपथ ग्रहण करेंगे। रेवती नक्षत्र 30 मई को शाम 7 बजे तक चतुर्थ चरण में चल रहा होगा। 30 मई को बृहस्पतिवार का दिन रहेगा। वहीं एकादशी भी गुरु का ही दिन होता है। इस नक्षत्र में नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण करने से भारत की छवि पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ पृथ्वी तत्व की राशि होने से पूरे जगत में भारत को यश मिलेगा। वहीं शपथ के लग्न की राशि वृश्चिक है जो कि विशिष्ट क्षमता प्रदान करेगी। ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार इस नक्षत्र में शपथ ग्रहण करने से भारत बेहद प्रभावशाली बनेगा।
इस नक्षत्र में शपथ लेने वाला भी वफादार, कल्पनाशील, निडर और शक्तिशाली होगा। रेवती नक्षत्र के चार पद हैं। पहला पद है माता-पिता को लाभ, दूसरे में धन, तीसरे में राजसम्मान, चतुर्थ प्रभावशाली बनाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान रेवती नक्षत्र के चतुर्थ पद चल रहा होगा। इसके कारण यह उन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाएगा। रेवती का स्वामी गुरु और राशि मीन है। इसके कारण आय के अनेक साधन विकसित करेंगे

मोदी और शपथ के दिन की कुंडली में है अद्भुत संयोग : - ज्योतिष के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह के समय रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण में चंद्र गति करते रहेंगे। जो लग्न के पांचवें में होने के कारण जनप्रियता, तथा रचनात्मक, कार्यों की ओर इशारा करते हैं। शपथ ग्रहण के समय लग्न कुंडली बनाने पर उस समय वृश्चिक लग्न है। जो कि स्थित राशि है और उसका स्वामी मंगल है। यह राजकीय कार्यों में शक्तिपूर्ण कार्यों की राशि होती है। प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली भी वृश्चिक लग्न की है। इसके कारण यह दोनों में अद्भुत संयोग है।

सौभाग्य योग बनाएगा भारत को विश्वगुरु :- शपथ ग्रहण के समय सौभाग्य योग भी बन रहा है जो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिभा को बढ़ाएगा और भारत को विश्वगुरु बनने के पथ की ओर अग्रसर करेगा। इस दौरान बुध की महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा व सूर्य व चंद्र की सूक्ष्म तथा प्राणदशा रहेगी, जो कि दर्शाती है कि समय परिस्थितियों का भी सहयोग सरकार को मिलेगा। जिससे खासतौर पर अर्थव्यवस्था, शिक्षा, नारी जगत से जुड़े मुद्दों व विषयों में बड़ी सफलता मिलेगी।

गुरु करेगा धार्मिक कार्यों को प्रेरित :- शपथ ग्रहण के समय लग्न की सर्वाधिक खास बात यह है कि वृश्चिक लग्न केन्द्र में ही बृहस्पति स्थित है। तथा सातवें केन्द्र में सूर्य से सीधे दृष्टि व राजयोग बना रहे हैं। यह दशम व पंचम का योग और भी खासियत लिए हुए है क्योंकि पांचवें में मीन राशि के चंद्र पर बृहस्पति की दृष्टि भी रहेगी। इसके कारण पूरे कार्यकाल के दौरान जनकल्याण, धार्मिक नैतिकता और उच्च प्रशासनिक मापदंडों पर कार्य होगा।

No comments:

Post a Comment

Pages