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Thursday, 30 May 2019

पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में पांच महिलाओं को मिली जगह

Modi Cabinet 2019: पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में पांच महिलाओं को मिली जगह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में पांच महिलाओं को जगह मिली है। इनमें चार का संबंध भाजपा से और एक अकाली दल से है। मंत्रिमंडल में हरसिमरत कौर बादल, निर्मला सीतारमन, स्मृति ईरानी, साध्वी निरंजन ज्योति और रेणुका सिंह को शामिल किया गया है।
भटिंडा से सांसद है हरसिमरत कौर बादल :- पंजाब की राजनीति में अपने तीखे और असरदार अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली हरसिमरत कौर बादल का ताल्लुक दो सियासती घरानों से रहा है। घर-परिवार में मिले सियासी तजुर्बो का इस्तेमाल उन्होंने बखूबी राजनीति के अखाड़े में किया है। हरसिमरत कौर का जन्म 25 जुलाई, 1966 को मजीठिया परिवार में सत्यजीत और सुखमंजुस मजीठिया के घर हुआ था। 21 नवंबर 1991 कोबादल खानदान के सुखबीर सिंह बादल से उनकी शादी हुई। शिरोमणि अकाली दल के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा। सियासत के साथ उनमें कारोबार की भी गहरी समझ है। हरसिमरत कौर बादल का कृषि, मीडिया और होटल उद्योग का बड़ा कारोबारी साम्राज्य है। हरसिमरत कौर बादल 2014 में पंजाब के भटिंडा से चुनकर संसद पहुंची और मोदी सरकार में केंद्रीय खाद्य और प्रसंस्करण मंत्री नियुक्त हुई। 2019 में एक बार फिर वो भटिंडा से निर्वाचित हुई है।

हरसिमरत कौर बादल दो बेटियों और एक बेटे की मां है। हरसिमरत के बेटे का पसंदीदा खेल फुटबाल है। वह कहती हैं कि जब मुझे अपने बेटे से बात करनी होती है तो मुझे यह पता होना चाहिए कि मैचेस्टर यूनाइटेड इस समय किस स्थिति में है। साथ ही कौन सी टीम का प्रदर्शन इस समय कैसा हैं। हरसिमरत बेटियों को बचाने का अभियान भी चला रही हैं। उनके इस अभियान का नाम 'नन्हीं' चाह’ है। वह बेटियों के पढ़ाई-लिखाई और उन्हें बेहतर माहौल दिलाने के लिए भी काफी काम करती रहती हैं। उनके इस अभियान कोअमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी तारीफ मिल चुकी हैं।

राज्यसभा से सांसद है निर्मला सीतारमन :- निर्मला सीतारमन को देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षामंत्री होने का गौरव प्राप्त है। इससे पहले इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अतिरिक्त कार्यभार के रूप में यह मंत्रालय संभाला था। रक्षामंत्री बनने ले पहले वो वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं।

वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार (1998-2004) के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग के लिए नामित हुईं, लेकिन 2004 में यूपीए की सरकार केंद्र में आने के पश्चात उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। सुषमा स्वराज, सीतारमण के राष्ट्रीय महिला आयोग में काम करने के तरीके से काफी प्रभावित हुईं जिसके बाद उन्होंने सीतारमण को पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव रखा। 2008 में, वह भाजपा में शामिल हुईं जब उनके पति तेलगु फिल्म स्टार चिरंजीवी की राजनीतिक पार्टी (प्रजा राज्यम) में शामिल हुए। निर्मला सीतारमन ने 1980 में सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु से स्नातक की शिक्षा ली और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विषय में एम.फ़िल. की।

निर्मला सीतारमन प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स के साथ वरिष्ठ प्रबंधक (शोध एवं विश्लेषण) के तौर पर भी कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ समय के लिए बीबीसी के साथ भी काम किया है। वह हैदराबाद में स्थित प्रणव स्कूल के संस्थापकों में से एक हैं। निर्मला सीतारमण का जन्म मध्यमवर्गीय तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका विवाह राजनीतिज्ञ परिवार में हुआ जहां उनकी सास आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की विधायक थीं जबकि उनके ससुर 1970 के दशक में आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार में एक मंत्री थें।
अमेठी से संसद पहुंची है स्मृति ईरानी :- स्मृति जुबिन ईरानी, ये उस शख्सियत का नाम है, जिन्होंने अपनी हार में भी जीत के सूत्र तलाशे और पांच साल की कड़ी मशक्कत के बाद गांधी खानदान का अमेठी का किला फतह कर लिया। उसके बाद जब सियासी रंजिश में उनके कार्यकर्ता को मौत के घाट उतार दिया तो उनकी सक्रियता और मिलनसारिता से वह राजनेता से जन –जन की नेता बन गई।
हार के साथ हुई थी सियासी शुरूआत :- स्मृति ईरानी के सियासी सफर की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। 2003 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और इसके बाद अपना पहला चुनाव दिल्ली के चांदनी चौक से लड़ा, लेकिन कांग्रेस के कपिल सिब्बल के सामने वह हार गई। 2011 में वह राज्यसभा के लिए चुनी गई। 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से लड़ा और इनको हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी ने उनके जज्बे को सलाम किया और उनको मानव संसाधन विभाग की अहम जिम्मेदारी दी।
अमेठी में की कड़ी मेहनत :- वे लगातार पांच साल तक अमेठी की जनता की सेवा में जुटी रही और आखिर 2019 के चुनाव में उन्होंने 2014 की हार का हिसाब चुकता करते हुए राहुल गांधी को हरा दिया। राजनीति से पहले उनकी पहचान छोटे पर्दे यानी टीवी सीरियल से रही। टीवी के लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकी सास भी कभी बहू थी’ की बहू तुलसी विरानी हिंदुस्तान के हर घर का पसंदीदा चेहरा थी।
सरगुजा से सांसद है रेणुका सिंह :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नई कैबिनेट में जगह पाने वाली रेणुका सिंह छत्तीसगढ़ की सरगुजा सीट से चुनकर संसद पहुंची है। उन्होंने कांग्रेस के खेलसाय सिंह को 1 लाख 35 हजार मतों से हराया है। इससे पहले वो दो बार 2003 से 2008 एवं 2008 से 2013 तक विधायक व प्रदेश में दो वर्ष के लिए मंत्री एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष रही हैं।
फतेहपुर से सांसद है साध्वी निरंजन ज्योति :- साध्वी निरंजन ज्योति लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर संसद पहुंची है। उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार सुखदेव प्रसाद को करीब दो लाख मतों से हराया। साध्वी निरंजन ज्योति का जन्म उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के पतिउरा गांव में एक निषाद परिवार में हुआ था। साध्वी इससे पहले भी पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री थी। उनके पास खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के राज्यमंत्री का प्रभार था। 2019 इलाहाबाद के अर्द्धकुंभ में उनके महामंडलेश्वर भी बनाया है।

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