क्लास में सोते मिले बच्चे, पता चला रात में खेल रहे थे PUBG - .

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Saturday, 6 April 2019

क्लास में सोते मिले बच्चे, पता चला रात में खेल रहे थे PUBG

क्लास में सोते मिले बच्चे, पता चला रात में खेल रहे थे PUBG

स्कूली बच्चों में पबजी गेम( PUBG Addiction) खेलने का खुमार इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि वे रातों की नींद भी नहीं ले रहे हैं। रात-रात जागकर पबजी खेलने के कारण दिन में स्कूल की कक्षा में वे सोते नजर आ रहे हैं। ये बच्चे पैरेंट्स के सो जाने के बाद रात 3 बजे तक दोस्तों के साथ ऑनलाइन ग्रुप बनाकर गेम खेलते हैं। कई स्कूलों में कक्षा के दौरान जब नींद लेने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ तो स्कूलों ने बच्चों की आदतों पर निगरानी रखना शुरू किया, तब यह बात निकल कर आई। सीबीएसई सहोदय ग्रुप इंदौर के चेयरपर्सन मोहित यादव ने बताया छठी कक्षा से बच्चों में ऐसी आदतें देखने को मिल रही हैं। स्कूल प्राचार्यों का कहना है जो बच्चे ज्यादा गेम खेल रहे हैं उनके व्यवहार में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।

परिजन को बुलाकर कर रहे काउंसिलिंग :- दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल अजय के. शर्मा ने बताया ऐसे बच्चों की पहचान हुई, जो रात में ग्रुप बनाकर गेम खेलते हैं। बच्चों के परिजन को बुलाकर निगाह रखने के लिए कहा गया है। स्कूल में मौजूद काउंसलर और साइबर एक्सपर्ट से बच्चों और परिजन की काउंसलिंग की जा रही है। परिजन को सलाह दे रहे हैं कि बच्चों को बेसिक फोन ही दें और इंटरनेट भी सीमित ही उपलब्ध कराएं।

गैजेट्स का सही उपयोग करना नहीं सिखा रहे :- चोइथराम स्कूल के प्रिंसिपल राजेश अवस्थी कहते हैं गेम की आदत के चलते बच्चों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। वे गेम के कैरेक्टर में इतने इन्वॉल्व हो जाते हैं कि इसका अहसास टीचर को भी हो जाता है। गेम और इंटरनेट आदत न बनें, इसके लिए जरूरत है कि परिजन बचपन से बच्चों को गैजेट्स न दें 

बड़े भी हो गए शिकार :- मनोचिकित्सक डॉ. वीएस पाल कहते हैं जिन स्कूली बच्चों को 8 से 10 घंटे नींद लेना चाहिए, वे रात में गेम में समय बिता रहे हैं। गेम की आदत इस तरह हावी हो गई है कि इसमें वक्त का पता नहीं लगता। पबजी जैसे गेम खेलने वाले बड़ी उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हर महीने ऐसे 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं।

पैरेंटिंग लॉक का उपयोग करें :- स्टेट सायबर सेल इंदौर के एसपी जितेंद्र सिंह कहते हैं पैरेंट्स को चाहिए कि वे इंटरनेट एक्सेस और गैजेट्स में पैरेंटिंग लॉक का उपयोग करें। इससे बच्चे वहीं देख पाएंगे जो पैरेंट्स चाहते हैं।

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