पहले ही गृहयुद्ध से जख्मी श्रीलंका में बढ़ते धार्मिक तनाव के बीच हुए धमाके, जानें पूरा मामला - .

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Sunday, 21 April 2019

पहले ही गृहयुद्ध से जख्मी श्रीलंका में बढ़ते धार्मिक तनाव के बीच हुए धमाके, जानें पूरा मामला

पहले ही गृहयुद्ध से जख्मी श्रीलंका में बढ़ते धार्मिक तनाव के बीच हुए धमाके, जानें पूरा मामला

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में रविवार को इस्टर के मौके पर एक के बाद एक लगातार कई ब्लास्ट हुए जिसमें काफी लोगों की जान चली गई और लगभग 400 से अधिक व्यक्ति घायल हो गए। कोलंबो के तीन चर्चों और तीन पांच सितारा होटलों को निशाना बनाया गया था। बौद्धों, मुसलमानों और ईसाइयों के बीच बढ़ते धार्मिक तनाव के बीच इन धमाकों ने धार्मिक तनाव को और बढ़ा दिया है। 
गृहयुद्ध के बाद से बढ़ता गया धार्मिक तनाव :- श्रीलंका लंबे समय से बहुसंख्यक सिंहली के बीच बंटा हुआ है, जो अत्यधिक बौद्ध हैं, अल्पसंख्यक तमिल जो हिंदू है, मुस्लिम और ईसाई हैं। यह देश पहले ही 1983-2009 के अपने गृहयुद्ध से जख्मी है, जब तमिल विद्रोहियों ने एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए लड़ाई लड़ी थी, हालांकी तब विद्रोहियों को कुचल दिया गया था, लेकिन हाल ही के वर्षों में एक धार्मिक विभाजन ने जोर पकड़ लिया है। एक ईसाई समूह ने कहा कि पिछले साल यीशु के अनुयायियों के खिलाफ भेदभाव, धमकी और हिंसा के 86 मामले सामने आए थे और इस साल 26 अन्य मामले आए हैं।  अमेरिकी विदेश विभाग ने 2018 की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी कि ईसाइयों को 'अनधिकृत सभाओं' के बाद पूजा स्थलों को बंद करने के लिए दबाव डाला गया था। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बौद्ध भिक्षुओं ने नियमित रूप से ईसाई और मुस्लिम पूजा स्थलों को बंद करने की कोशिश की।
मुस्लिमों पर भी हुए  हमले :- सरकार को मुस्लिम विरोधी दंगों के बीच आपातकाल की स्थिति घोषित करने के लिए मजबूर किया। बौद्ध समुदाय ने पवित्र बौद्ध स्थलों को परिवर्तित करने और नष्ट करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। एक कट्टरपंथी मुस्लिम समूह, NTJ, को बौद्ध प्रतिमाओं के विध्वंस से जोड़ा गया और कथित रूप से कहा गया कि ईसाई चर्चों पर हमला करने की साजिश रची गई है। 2012 की जनगणना के अनुसार श्रीलंका की आबादी 2 करो़ड़ 22 लाख है जिसमें से 70 फीसदी बौद्ध धर्म, 13 फीसदी हिंदु, 10 फीसदी मुस्लमान और 7 प्रतिशत ईसाई धर्म के लोग है।

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