एक महिला की जिद ने ठेठ ग्रामीणों में भर दिया रक्तदान का जुनून - .

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Saturday, 13 April 2019

एक महिला की जिद ने ठेठ ग्रामीणों में भर दिया रक्तदान का जुनून

Blood Donation: एक महिला की जिद ने ठेठ ग्रामीणों में भर दिया रक्तदान का जुनून

कहने को शुजालपुर ठेठ ग्रामीण इलाका। जहां लोगों में भ्रांतियों की भरमार। ऐसे में रक्तदान बात तो सोचना भी बेकार। लेकिन इसे एक स्वास्थ्यकर्मी की जिद ने ग्रामीणों के जुनून में बदल दिया। अब तकरीबन हर दूसरा व्यक्ति सहर्ष रक्तदान को तैयार रहता है। इसका नतीजा यह है कि शुजालपुर अस्पताल में तो अब ब्लड के लिए किसी को भटकना नहीं पड़ता, बल्कि यहां से हमीदिया जैसे प्रदेश के बड़े अस्पताल की भी भरपाई होती है। पिछले एक साल में शुजालपुर से 1000 यूनिट ब्लड हमीदिया को डोनेट किया गया है। दस साल पहले शुजालपुर अस्पताल के एकीकृत परामर्श व जांच केंद्र (आईसीटीसी) में बतौर काउंसलर जया माहेश्वरी पदस्थ हुईं। अस्पताल में आए दिन लोगों का ब्लड के लिए परेशान होना जया ने चुनौती के रूप लिया और लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना व खुद का शौक बना लिया।
युवाओं को तैयार किया :- उन्होंने अस्पताल में काउंसलिंग के लिए आने वाले लोगों को प्रेरित करना शुरू किया। खासकर युवाओं को रक्तदान के लिए तैयार किया। रक्तदान के फायदे व महत्व बताकर लोगों में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांति को दूर किया। जया की जिद रंग लाई और प्रेरणा स्वरूप रक्तदान के लिए युवाओं के ग्रुप बनने लगे। अब तक शुजालपुर में रक्तदाताओं के 12 ग्रुप बन गए हैं, जिनके सैकड़ों सदस्य हैं। ब्लड की जरूरत पर व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए रक्तदाता को पता चल जाता है।
लगातार लगते हैं शिविर :- साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर के अलावा त्योहारों व सामाजिक-धार्मिक आयोजनों में जया रक्तदान शिविर आयोजित कराती हैं। स्थानीय अस्पताल, गायत्री परिवार, हमीदिया ब्लड बैंक को शिविर लगाने के लिए बुलाया जाता है। शिविर लगने के करीब पांच दिन पहले से जया गांवों के लोगों, जन प्रतिनिधियों से सपंर्क कर रक्तदान करने के लिए कहती हैं। उन्होंने बताया कि 800 की आबादी वाले चितौली गांव से ही इस साल 50 यूनिट रक्तदान हुआ है।
लोगों को बताए फायदे :- जया ने सबसे पहले युवाओं को तैयार किया। इसके लिए वे कॉलेजों व विभिन्न् आयोजनों में गईं। यहां बताया कि रक्तदान से पांच जरूरी जांचें हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, वीडीआरएल व मलेरिया मुफ्त में हो जाती हैं। दिल की बीमारियां, लकवा आदि का खतरा कम हो जाता है। इसके बाद लोग तैयार होने लगे। किसने कब रक्तदान किया उसका हिसाब रहता है। वह रक्तदाता को फोन कर बताती हैं कि वे कब फिर से रक्तदान कर सकते हैं। जया के इस कार्य को प्रोत्साहित करते हुए शुक्रवार को हमीदिया में सम्मानित किया गया।

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