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Sunday, 24 March 2019

बस्ते का बोझ नहीं हो रहा काम, शिक्षा मंत्री को गाइडलाइन ही पता नहीं

MP: बस्ते का बोझ नहीं हो रहा काम, शिक्षा मंत्री को गाइडलाइन ही पता नहीं

बच्चों के नाजुक कंधों पर बस्ते का बोझ कम करने के लिए सीबीएसई ने 2016-17 में स्कूलों को गाइडलाइन जारी की थी। इसमें बच्चों की कक्षा के हिसाब से बैग का वजन तय किया गया था। साथ ही लॉकर बनाने के निर्देश दिए गए थे। वहीं इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने नवंबर 2018 में एक बार फिर निर्देश जारी किए थे।
मप्र स्कूल शिक्षा विभाग इस संबंध में कमेटी गठित करने वाला था, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी की मॉनिटरिंग में निजी स्कूलों का निरीक्षण होने वाला था। लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी कोई कमेटी गठित नहीं की गई। एमएचआरडी ने निर्देश में स्कूल बैग का वजन कम करने के लिए हर क्लास और बच्चे की उम्र के हिसाब से बस्ते का वजन तय किया गया था।

इसमें पहली से दूसरी कक्षा के बच्चों के बैग का वजन 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। इसी तरह तीसरी से 5वीं कक्षा तक के बच्चों के बैग का वजन 2-3 किलोग्राम, छठवीं से सातवीं के लिए 4 किलो, 8वीं व 9वीं के बस्ते का वजन 4.5 किलो और 10वीं कक्षा के बस्ते का वजन 5 किलोग्राम होना चाहिए। इस मामले में कई साल पहले भी सीबीएसई ने दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन स्कूलों ने सभी नियम ताक पर रख दिए। कोई नियम अब तक लागू नहीं किया गया। हैरत की बात यह है कि स्कूल शिक्षा मंत्री को ही गाइडलाइन की जानकारी नहीं है।
8वीं का बच्चा ढो रहा 20 किलो का बैग :- राजधानी के कई स्कूलों के बच्चे भारी-भारी 15 से 20 किलो के बैग ले जा रहे हैं। जिसमें 8वीं कक्षा का बच्चा 20 किलो का वजन ढोने को मजबूर है। वहीं, 5वीं के बच्चे भी 10 से 12 किलो का वजन ढो रहे हैं।

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