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Monday, 4 February 2019

कस्टमर्स की जेब पर बढ़ सकता है बोझ, TV चैनल खर्च बढ़ने के आसार

DTH New Guidelines: कस्टमर्स की जेब पर बढ़ सकता है बोझ, TV चैनल खर्च बढ़ने के आसार

 टेलीकॉम के साथ टीवी चैनलों के लिए नियामक ट्राई ने एक फरवरी से नई टैरिफ व्यवस्था लागू करते समय दावा किया था कि इससे उपभोक्ताओं के टीवी चैनलों पर मासिक खर्च में कमी आएगी लेकिन एक रिपोर्ट का अनुमान इससे विपरीत है। रिपोर्ट का कहना है कि नई व्यवस्था से ज्यादातर दर्शकों का मासिक बिल बढ़ने की संभावना है। लेकिन सिर्फ लोकप्रिय चैनल चुनने वालों को फायदा मिल सकता है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार ट्राई की नई गाइडलाइन के अनुसार ब्रॉडकास्टरों और वितरकों द्वारा घोषित नेटवर्क कैपेसिटी फीस और चैनल शुल्क से अधिकांश दर्शकों का मासिक बिल बढ़ सकता है। ट्राई की नई व्यवस्था चैनल प्राइसिंग में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए लागू की गई है। उसका कहना है कि इससे दर्शकों को सिर्फ अपने पसंदीदा चैनल देखने की आजादी होगी। उन्हें चयनित चैनलों का ही शुल्क देना होगा।ब्रॉडकास्टरों को प्रत्येक चैनल का अलग-अलग शुल्क तय करना होगा। अगर वे चाहें तो पैक भी लांच कर सकते हैं।

क्रिसिल के सीनियर डायरेक्टर सचिन गुप्ता ने कहा कि हमारे विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि नई व्यवस्था के अनुसार ज्यादातर दर्शकों का मासिक बिल करीब 25 फीसद तक बढ़ सकता है। उनका औसत मासिक बिल मौजूदा 230-240 रुपये से बढ़कर 300 रुपये तक पहुंच सकता है। जीएसटी जोड़कर यह चार्ज और ज्यादा हो जाएगा। लेकिन जो दर्शक सबसे लोकप्रिय पांच चैनलों का चयन करते हैं तो उनका बिल अवश्य कम हो सकता है।
रेटिंग एजेंसी का मानना है कि नई व्यवस्था से ब्रॉडकास्टिंग उद्योग में कंसोलिडेशन होगा क्योंकि कंटेंट ही सर्वोपरि और दूसरों से अलग करने वाला साबित होगा। रिपोर्ट के अनुसार ब्रॉडकास्टरों का मासिक शुल्क से मिलने वाला राजस्व करीब 40 फीसद बढ़ जाएगा। यह राजस्व प्रति उपभोक्ता प्रति माह मौजूदा 60-70 रुपये से बढ़कर 94 रुपये तक पहुंच सकता है।

हालांकि ब्रॉडकास्टरों को कम लोकप्रिय चैनलों को पैकेज में जगह देना मुश्किल होगा। अलोकप्रिय या अनजाने चैनलों के लिए तो कारोबार करना ही मुश्किल हो जाएगा और उन्हें बंद करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार डीटीएच और केबल ऑपरेटरों जैसे चैनल वितरकों पर नई व्यवस्था का असर मिलाजुला रहेगा। क्रिसिल के डायरेक्टर नीतेश जैन के अनुसार नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफार्म को बड़ा फायदा होगा क्योंकि मासिक बिल बढ़ने से बड़ी संख्या में दर्शक शिफ्ट कर सकते हैं। डाटा सस्ता होने से दर्शकों को ओटीटी प्लेटफार्म पर शिफ्ट होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

इस समय ज्यादातर वितरक नेटवर्क कैपेसिटी फीस 130 रुपये प्रति माह चार्ज कर रहे हैं। वे पेड चैनलों के लिए 20 रुपये (25 एसडी चैनलों के लिए) अलग से नेटवर्क फीस ले रहे हैं। ब्रॉडकास्टरों ने अपने लोकप्रिय चैनलों का शुल्क अधिकतम सीमा के अनुरूप 19 रुपये तय किया है। रिपोर्ट का कहना है कि नई व्यवस्था की अभी शुरुआत भर है। आने वाले समय में बाजार की स्थितियों, दर्शकों के रुझान और प्रतिस्पर्धा के अनुसार ब्रॉडकास्टरों और वितरकों के शुल्क में कमी आ सकती है।

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