कहां है जैश सरगना मसूद? भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए खोजना बड़ी चुनौती - .

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Sunday, 24 February 2019

कहां है जैश सरगना मसूद? भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए खोजना बड़ी चुनौती

Pulwama News: कहां है जैश सरगना मसूद? भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए खोजना बड़ी चुनौती

पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला करवाने वाले पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर कहां है? यह सवाल भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक मसूद अजहर आखिरी बार दिसंबर, 2017 में सार्वजनिक मंच पर मुल्तान में दिखा था, जहां उसने एक रैली को संबोधित किया था और भारत के खिलाफ खूब आग को उगला था।
उसके बाद भी वह रैलियों को संबोधित करता रहा है लेकिन एजेंसियों को इस बात की पक्की जानकारी नहीं है कि वह खुद रैली स्थलों पर उपस्थित था, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से रैलियों में उसके रिकार्डेड भाषण ही सुनाये जाते हैं। खुफिया एजेंसियों को शक है कि मसूद अजहर पाकिस्तान सेना के सेवानिवृत्त अफसरों की सुरक्षा में है। अजहर के लिए यह विशेष सुरक्षा घेरा तीन वर्ष पहले बनाई गई थी। जब पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार ने उसे व उसके कुछ संबंधियों को नजरबंद किया था।

जनवरी, 2016 में उसे नजरबंद किया गया और तकरीबन पांच महीने बाद इसे विशेष सुरक्षा में कहीं और स्थानांतरित किया गया। एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक पठानकोट हमले के पहले भी अजहर के लिए सुरक्षा इंतजामात थे लेकिन वह खुलेआम मजलिसों और धार्मिक जुलूसों में हिस्सा लेता था। यही नहीं बहावलपुर मस्जिद स्थित अपने हेडक्वार्टर में भी वह आता-जाता रहता था। लेकिन पठानकोट हमले के बाद उसे वहां नहीं देखा गया है। जैश सरगना के जिन दो करीबी रिश्तेदारों को नजरबंद किया गया था उनकी भी कोई सूचना नहीं है। खुफिया एजेंसियों की मानें तो बहावलपुर स्थित जिस मस्जिद की बात की जा रही है संभवतः अब जैश उसका पहले की तरफ इस्तेमाल नहीं करता। जैश किसी और जगह से संचालित हो रहा है।
यही वजह है कि पुलवामा हमले के बाद जब पाकिस्तान सरकार की तरफ से यह सूचना दी गई कि बहावलपुर स्थिति मस्जिद को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है तो भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने उसे नौटंकी करार दिया। सूत्रों का कहना है कि पुलवामा हमले के बाद जैश या अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ पाकिस्तान सरकार की तरफ से कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। एफएटीएफ की डर से हाफिज सईद के संगठन जमात उल दावा और इसके एक सहयोगी संगठन के खिलाफ कार्रवाई जरूर की गई है लेकिन वह भी आंख में धूल झोंकने की तरह है। पिछली दफे भी एफएटीएफ की बैठक से पहले पाकिस्तान ने कुछ आतंकी संगठनों के बैंक खातों को जब्त करने का दावा किया था।
यही नहीं जब भी भारत में कोई बड़ी आतंकी कार्रवाई होती है तो वह इस तरह के कदम उठाने की घोषणा करता है लेकिन कुछ महीने बीत जाने के बाद फिर सारे कदम वापस ले लिये जाते हैं। मुंबई हमले और पठानकोट हमले के बाद ऐसा देखा जा चुका है।

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