कांग्रेस कुसमरिया के जरिए बुंदेलखंड में सेंध लगाने की तैयारी में - .

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Friday, 8 February 2019

कांग्रेस कुसमरिया के जरिए बुंदेलखंड में सेंध लगाने की तैयारी में

कांग्रेस कुसमरिया के जरिए बुंदेलखंड में सेंध लगाने की तैयारी में

विधानसभा चुनाव के पहले की नाराजगी के चलते वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया आखिरकार कांग्रेस में शामिल हो गए। सरताज सिंह के बाद वे ऐसा करने वाले भाजपा के दूसरे बड़े और वरिष्ठ नेता हैं। कुसमरिया के कांग्रेस में शामिल होने को बुंदेलखंड में कांग्रेस की कुशल रणनीति के रुप में देखा जा रहा है क्योंकि कुसमरिया बुंदेलखंड के कद्दावर नेता माने जाते हैं।
कांग्रेस कुसमरिया के जरिए भाजपा के गढ़ माने जाने वाले बुंदेलखंड में सेंध लगाने की तैयारी में है। वर्तमान में बुंदेलखंड की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है, लेकिन विधानसभा चुनाव में परिदृश्य थोड़ा बदला है। यहां की 8 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 3 पर जीत हासिल की। अब कुसमरिया के कांग्रेस में शामिल होने से भाजपा को नुकसान होने का पूरा अंदेशा है क्योंकि कुसमरिया अकेले नहीं अपने करीब 15 हजार कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शाम‍िल हुए हैं।

कद्दावर नेता की पहचान :- डॉ. कुसमरिया के इस कदम को बुंदेलखंड की राजनीति में बड़ा फेरबदल माना जा रहा है। कुसमरिया का बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर, दमोह, पथरिया, छतरपुर, खजुराहो और पन्ना में खासा प्रभाव है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में डॉ. कुसमरिया ने भाजपा से बगावत करते हुए दमोह और पथरिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे। वे खुद तो दोनों जगह से हार गए लेकिन इन दोनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को भी हार का कारण भी बने। जाहिर है कुसमरिया भाजपा के लिए परेशानी बनेंगे। दमोह से पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को हार का सामना करना पड़ा। वे चार बार विधानसभा और पांच बार लोकसभा चुनाव जीते। 2008 में विधानसभा चुनाव जीतकर वे कृषि मंत्री बनाए गए थे, लेकिन 2013 में वे चुनाव हार गए थे।

बड़े बड़े कुर्मी नेता :- कुसमारिया भाजपा सरकार में मंत्री तो रहे लेकिन उनकी पहचान बुंदेलखंड के बड़े कुर्मी नेता के रुप में है। अपने इसी प्रभाव के चलते कुसमरिया अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़े और जीते भी। वे खजुराहो, दमोह, पन्ना सीटों से लोकसभा चुनाव जीते। इसके अलावा दमोह जिले के हटा, पथरिया सीट से विधानसभा चुनाव भी जीते। अब कुसमरिया के आने से कांग्रेस को बुंदेलखंड में जरूर फायदा मिलेगा और कांग्रेस पहले से ज्यादा मजबूत होगी। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दमोह की 8 विधानसभाओं में लोधी नेताओं को उतारकर नई रणनीति अपनाई और 3 सीटों पर जीत हासिल की।

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