मध्‍यप्रदेश में महंगी जमीन और घाटे के कारण पेट्रोल पम्प मालिक बनने से पीछे हट रहे निवेशक - .

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Wednesday, 6 February 2019

मध्‍यप्रदेश में महंगी जमीन और घाटे के कारण पेट्रोल पम्प मालिक बनने से पीछे हट रहे निवेशक

मध्‍यप्रदेश में महंगी जमीन और घाटे के कारण पेट्रोल पम्प मालिक बनने से पीछे हट रहे निवेशक

किसी समय पेट्रोल पंप खोलना रसूख और रईसी की पहचान मानी जाती थी लेकिन धीरे-धीरे यह धारणा टूटती जा रही है। पेट्रोलियम कंपनियों को पंपों के लिए अब डीलर तलाशने में मुश्किल आ रही है। पहले जहां पंप के लिए आवेदन देने वालों की लाइन लगी रहती थी लेकिन बढ़ते निवेश, महंगी जमीन और कम होते मुनाफे के कारण कई लोग अब पंप लेने से हिचकिचा रहे हैं। इंदौर में पिछले पांच-सात साल में चार-पांच पंप तो बंद हो चुके हैं। इनकी जगह उनके मालिकों ने कॉम्प्लेक्स बनाकर अधिक मुनाफा कमा लिया। मुश्किल हालात की एक बानगी यह है कि मध्यप्रदेश में भारत सरकार की तीनों पेट्रोलियम कंपनियों ने हाल ही में सात हजार से अधिक पंपों के डीलर बनाने के लिए विज्ञापन जारी किया लेकिन 10 फीसदी से अधिक पंपों के लिए आवेदन ही नहीं आए। कंपनियों के अधिकारी बताने से परहेज कर रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि शहरों में जमीन की कमी और महंगी होती जमीन पेट्रोल पंपों की राह में बड़ा रोड़ा है। पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि एक पंप को लगाने में लगभग 70 लाख स्र्पए का निवेश करना पड़ता है।

इसमें जमीन की कीमत अलग है। इसके अलावा पंप चलाने के लिए 25-30 लाख वर्किंग कैपिटल चाहिए, वह अलग। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर जैसे शहरों में प्राइम लोकेशन की जमीन करोड़ों में मिलती है। दो-तीन महीने पहले इंदौर के बड़ा गणपति इलाके में एक पंप बंद हो गया। इससे पहले किबे कंपाउंड, पलासिया चौराहा और एमजी रोड पर भी पंप बंद हो चुके हैं। इन जगहों पर बहुमंजिला इमारतें बन गईं।
पान दुकान की तरह होंगे पंप :- एमपी फेडरेशन ऑफ पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के सचिव सुधीर ऐरन के मुताबिक एक तरफ सरकार कहती है ईंधन बचाओ, इम्पोर्ट कम करो और डॉलर कम खर्च करो, दूसरी तरफ बिना सोचे-समझे पेट्रोल पंप खोले जा रहे हैं। एक समय आएगा जब पान दुकान की तरह पेट्रोल पंप हो जाएंगे। जिनके पंप नहीं चल रहे, वे बंद करते जा रहे हैं। इंदौर में मेरे ही पंप की जमीन 15-20 करोड़ की है। मल्टी स्टोरी बिल्डिंग तान दें तो पंप से 10-20 गुना कमाई हो सकती है।
पांच साल में 120 से 250 हुए :- इंदौर पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के संरक्षक पारस जैन कहते हैं कि पुराने जमाने में कहावत थी कि किसी से दुश्मनी निकालना हो तो उसे ट्रक दिलवा दो। यही कहावत अब बदलकर हो गई है 'दुश्मनी निकालना हो तो पंप दिलवा दो"। इंदौर में पांच साल पहले 120 पंप थे जो अब 250 हो गए। गांवों में भी इनकी तादाद तेजी से बढ़ रही है।
अदालत का दरवाजा भी खटखटा रहे पंप एसोसिएशन :- पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा एक साथ इतनी तादाद में पेट्रोल पंप की डीलरशिप के लिए टेंडर निकालने पर मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप आनर्स एसोसिएशन ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष भोपाल निवासी अजय सिंह बताते हैं कि पेट्रोल पंप खोलने में इंडियन रोड कांग्रेस और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। एक पंप से दूसरे की दूरी 300 मीटर होना चाहिए लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों ने नियम को ताक पर रखकर पंप के बगल में ही दूसरा पंप देने की तैयारी कर ली है। रिमोट एरिया में कई पंप बंद होने के कगार पर हैं। वहां पेट्रोल की बिक्री भी नहीं है, फिर भी उसी जगह तीन-तीन पंप नए दे दिए। पर्यावरण भी बड़ा मुद्दा है।
अधिक पंप होने पर वातावरण में पेट्रोल का वाष्पीकरण एवोप्रेशन भी बढ़ेगा। इससे प्रदूषण अधिक होगा। सर्दी के दिनों में एक पंप से एक महीने में 2.5 प्रतिशत पेट्रोल वाष्पीकृत होता है, जबकि गर्मी के दिनों में यही मात्रा 4 फीसदी हो जाती है।

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