चंबल के विशेषज्ञों को छोड़ इटावा की टीम बुलाई, वह भी नहीं पहुंची, रेस्क्यू टला - .

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Tuesday, 5 February 2019

चंबल के विशेषज्ञों को छोड़ इटावा की टीम बुलाई, वह भी नहीं पहुंची, रेस्क्यू टला

चंबल के विशेषज्ञों को छोड़ इटावा की टीम बुलाई, वह भी नहीं पहुंची, रेस्क्यू टला

जाल में फंसे घड़ियाल का रेस्क्यू सोमवार को भी नही हो पाया। इसकी वजह चंबल की टीम को छोड़ल इटावा से बुलाई गई एक्सपर्ट टीम को भोपाल नहीं पहुंच पाना बताया जा रहा है है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जाल नहीं मिल पाने के कारण टीम नहीं आई है। इस तरह सोमवार को भी रेस्क्यू नहीं हुआ। घड़ियाल को बीते दस दिनों से जाल में फंसा हुआ देखा जा रहा है।
वन विभाग के अफसरों ने रविवार शाम को ग्वालियर सीसीएफ एचएस मोहंता से बात कर चंबल से घड़ियाल पकड़ने वाली एक्सपर्ट टीम बुलाई थी। कुछ ही घंटे बाद उन्हें टीम भेजने से यह कहकर मना कर दिया कि इटावा से टीम बुलाई गई है। वहीं इटावा की टीम के तरफ से जाल नहीं मिलने के कारण भोपाल पहुंचने में असमर्थता जताई गई है। इस तरह रेस्क्यू टालना पड़ा है। हालांकि पूरे दिन वन विभाग के अमले ने घड़ियाल की डैम में निगरानी की है। अब इटावा की टीम ने मंगलवार शाम तक भोपाल पहुंचने का भरोसा दिया है।

9 दिन में एक भी संस्था नहीं आई सामने :- प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणियों के संरक्षण पर कई संस्थाएं काम कर रही हैं। बीते नौ दिन में घड़ियाल को बचाने एक भी संस्था खुलकर सामने नहीं आई हैं। जबकि इनमें से कुछ संस्थाओं को प्रदेश से अच्छा खासा फंड मिलता है। यह फंड वन्यप्राणियों के संरक्षण के नाम पर ही दिया जा रहा है।यह भी पढ़ें

रिसर्च दल को भी खुला मिला घड़ियाल का मुंह :- विलुप्तप्राय घड़ियाल को रेस्क्यू करने की खबर देशभर में फैल चुकी है। यह खबर सुनने के बाद चंबल सेंचुरी में रिसर्च करने वाले छात्रों का एक दल सोमवार को कलियासोत डैम पहुंचा। ये छात्र जीवाजी विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं। इनमें रामकुमार लोधी अतिथि विद्ववान है। योगेश सिंह और राजेश गुर्जरवार पीएचड़ी कर रहे हैं। तीनों ने दूरबीन से पांच घंटे घड़ियाल पर नजर रखी।

रामकुमार ने बताया की घड़ियाल का यहां होना आश्चर्यजनक है। क्योंकि यह उसके जीवन के लिए उचित जगह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां मगर तो रह सकते हैं लेकिन घड़ियालों के लिए डैम में खतरा हो सकता है। योगेश सिंह ने दूरबीन के आधार पर कहा कि घड़ियाल के मुंह पर जाल लपटा है लेकिन वहा पर्याप्त मात्रा में खुल रहा है इसलिए उसे भोजन करने में कोई परेशानी नहीं है। राजेश गुर्जरवार ने कहा कि उक्त घड़ियाल मादा है। उन्होंने मादा घड़ियाल के लक्षण के बारे में कहा कि नर घड़ियाल के थूथन पर ऊंचा गुंबद नुमा टाूप होता है जो जाल में फंसे घड़ियाल के थूथन पर नहीं है। यानी यह मादा घड़ियाल है।

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