मध्यप्रदेश में बच्चे नहीं सुरक्षित, पूरे देश में सबसे ज्यादा बच्चे यहां हुए लापता - .

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Friday, 4 January 2019

मध्यप्रदेश में बच्चे नहीं सुरक्षित, पूरे देश में सबसे ज्यादा बच्चे यहां हुए लापता

मध्यप्रदेश में बच्चे नहीं सुरक्षित, पूरे देश में सबसे ज्यादा बच्चे यहां हुए लापता

मध्यप्रदेश में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। वर्ष 2016 में इस मामले में प्रदेश ने देश के सारे राज्यों को पीछे छोड़ दिया। इस साल सबसे ज्यादा बच्चे मध्यप्रदेश से गायब हुए। इनमें भी लड़कियों की संख्या अधिक है। लोकसभा में गृह मंत्रालय की ओर से पेश किए गए जवाब में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों में देश में सबसे बुरी स्थितियों में मध्यप्रदेश है। 
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों में बताया गया है कि वर्ष 2014 में मध्यप्रदेश से कुल 6689 बच्चे गायब हुए थे, इनमें से 4 हजार लड़कियां थीं। गुम हुए बच्चों में 4569 बच्चों का पता नहीं लगाया जा का था। इसके अगले साल प्रदेश में गायब होने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 7919 हो गई। लड़कियों के गायब होने का आंकड़ा भी 4 हजार से बढ़कर 5590 पर जा पहुंचा। इस साल भी प्रदेश में 3565 बच्चों की कोई खोज खबर नहीं की जा सकी। इसके अगले साल भी प्रदेश से 8503 बच्चे मिसिंग श्रेणी में दर्ज हुए, इनमें से 3871 बच्चों को नहीं खोजा जा सका।
सबसे गंभीर बात तो यह है कि यदि बच्चे गायब हो भी रहे हैं और अपराध कायम भी हो रहे हैं तो बच्चों को गायब करने वालों का दोष सिद्ध करने में व्यवस्था नाकाम हो रही है। लोकसभा में इसी जवाब से पता चलता है कि प्रदेश में दर्ज होने वाले हजारों मामलों में केवल 786 लोगों का ही अपराध सिद्ध हो पाया है। यानी अपराधी बहुत आसानी से बच्चों को गायब करके भी साफ बच निकल रहे हैं।
मीडिया रिसोर्स सेंटर विकास संवाद ने भी बच्चों के गुम होने वाले आंकड़ों का एक अध्ययन किया है। एनसीआरबी के आंकड़ों में सामने आया कि अकेले वर्ष 2016 में भारत में 63407 बच्चे गुम हुए। इनमें से 41067 लड़कियां थीं। यह उल्लेख कर देना जरूरी है कि इसके पहले के वर्षों में (दिसंबर 2015 तक) भारत में गुम हुए कुल बच्चों में से 48162 बच्चों की तलाश नहीं हो सकी थी। जिन बच्चों की तलाश नहीं हो पायी, उनमें से 29327 लड़कियां थी। यदि इन दोनों श्रेणियों (पहले से गुम बच्चे और वर्ष 2016 में गुम बच्चे) को जोड़ा जाए, तो पता चलता है कि वर्ष 2016 की स्थिति में 111569 बच्चे गुम (लापता) थे। जिनमें से 70394 लड़कियां थी।
ऐसे गुम बच्चों की संख्या, जिन्हें खोजा नहीं जा सके हैं, उनकी भारत में सबसे ज्यादा संख्या पश्चिम बंगाल (7546, लड़कियां - 6300), दिल्ली (7740, लड़कियां - 4554), महाराष्ट्र (5594, लड़कियां – 3295), ओड़ीसा (3890, लड़कियां – 2852) और मध्यप्रदेश (3565, लड़कियां – 2585) में रही। वर्ष 2016 में भारत में गुम हुए 63407 बच्चों में से सबसे ज्यादा बच्चे मध्यप्रदेश (8503, लड़कियां – 6037), पश्चिम बंगाल (8335, लड़कियां – 5986), दिल्ली (6921, लड़कियां – 3982), बिहार (4817, लड़कियां – 3730) और तमिलनाडु (4632, लड़कियां – 3162) गुम हुए।
बच्चों की खोज :- वर्ष 2016 तक गुम रहे 111569 बच्चों में से आधे बच्चों (55944) की खोज की जा सकी। शेष आधे बच्चे तलाशे नहीं जा सके। सबसे ज्यादा बच्चे मध्यप्रदेश (8197, लड़कियां - 5692), दिल्ली (5863, लड़कियां – 3235), पश्चिम बंगाल (5388, लड़कियां - 3848) और तमिलनाडु (4660, लड़कियां - 3202) में खोजे गए। बहरहाल वर्ष 2015 के अंत में गुम बच्चों की संख्या 48162 थी, जो वर्ष 2016 के अंत में बढ़कर 55625 हो गई। सबसे ज्यादा बच्चे पश्चिम बंगाल (11493, लड़कियां – 8438), दिल्ली (8798, लड़कियां - 5301), महाराष्ट्र (5625, लड़कियां – 3169) और ओड़ीसा (5202, लड़कियां – 3836) लगातार मिसिंग थे।

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