कर्जमाफी के आवेदन जमा करवाने में होशंगाबाद प्रदेश में अव्वल - .

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Wednesday, 30 January 2019

कर्जमाफी के आवेदन जमा करवाने में होशंगाबाद प्रदेश में अव्वल

Madhya Pradesh : कर्जमाफी के आवेदन जमा करवाने में होशंगाबाद प्रदेश में अव्वल

प्रदेश सरकार द्वारा कि सानों के लिए चलाई जा रही कि सान कर्जमाफी योजना के तहत होशंगाबाद जिले में सबसे बेहतर काम हुआ है। पिछले सप्ताह प्रदेश स्तरीय बैठक के दौरान 51 जिलों के कार्यों की समीक्षा की गई, जिसमें होशंगाबाद जिले का प्रदर्शन प्रदेश के 51 जिलों में से सबसे अव्वल है। जिले में करीब एक लाख 24 हजार 65 हजार हितग्राही कि सान हैं।
इनमें से 96 फीसदी कि सानों के कर्जमाफी के फार्म जमा हो चुके हैं। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा ने कलेक्टर, सीईओ को संबोधित करते हुए व्‍हाट्सएप पर एक पोस्ट भी किया है, जिसमें उन्होंने सबसे बेहतरीन काम होशंगाबाद का बताया है। होशंगाबाद जिले में कि सानों के कर्जमाफी के फार्म भरने के लिए कलेक्टर आशीष सक्सेना ने पंचायत स्तर पर टीमों का गठन कि या था। कि सान फार्म भरने के लिए जागरुक हों, इसके लिए कलेक्टर ने हर सप्ताह सरपंचों के साथ बैठकें भी की। होशंगाबाद के बाद बुरहानपुर, डिंडौरी, उज्जैन, नीमच व सिवनी को स्थान दिया गया है।

होशंगाबाद जिले को मिली इस उपलब्धि पर जिला प्रशासन के आला अधिकारी गदगद हैं। कलेक्टर आशीष सक्सेना का कहना है कि होशंगाबाद के प्रशासनिक अधिकारियों ने बेहतर तालमेल और समन्वय से काम कि या, जिसका नतीजा यह रहा है कि कि सानों तक पहुंच सके और उनके फार्म भरवा सके । 
9 हजार कि सानों की चल रही खोज :- जिले के नौ हजार कि सान ऐसे हैं जिन्होंने कर्जमाफी को लेकर फार्म नहीं भरे हैं। कलेक्टर का मानना है कि यह ऐसे कि सान हैं जो या तो टैक्स जमा करते हैं या फिर सरकारी नौकरी में हैं या जिले से बाहर के हैं। इन नौ हजार कि सानों तक पहुंचने के लिए जिले में सर्वे शुरू करा दिया गया है। कलेक्टर का दावा है कि जल्द ही इन कि सानों को खोज लिया जाएगा। कर्जमाफी को लेकर लीड बैंक मैनेजर आरके त्रिपाठी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
इन बैंकों के कि सानों को नहीं मिल रहा लाभ :- जिले में आईसीआईसीआई और फे डरल बैंक के कर्जदार कि सानों को कर्ज माफी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 23 जनवरी को नाराज कि सानों ने कलेक्ट्रेट के सामने धरना प्रदर्शन भी किया था। कि सानों की मांग थी कि आईसीआईसीआई और फे डरल बैंक के कि सानों को भी इस योजना में शामिल कि या जाए। कि सानों की मांग को प्रशासन ने प्रदेश स्तर पर पहुंचाया था, लेकि न पॉलिसी मैटर के चलते कु छ हल नहीं निकल सका।

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