मांसाहारी बच्चे बोले-हमें चिकन, अंडा करी चाहिए, दाल-चावल से पेट नहीं भरता - .

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Thursday, 3 January 2019

मांसाहारी बच्चे बोले-हमें चिकन, अंडा करी चाहिए, दाल-चावल से पेट नहीं भरता

राष्ट्रीय शालेय खेल: मांसाहारी बच्चे बोले-हमें चिकन, अंडा करी चाहिए, दाल-चावल से पेट नहीं भरता

64वीं राष्ट्रीय शालेय ताईक्वांडो प्रतियोगिता में शामिल होने आए 27 राज्य और 4 संगठनों के स्कूली बच्चों को एक जैसा खाना मुसीबत बन गया है। पहले दिन अधिक मिर्ची होने के कारण कई राज्यों के बच्चों के पेट खराब हो गए। जिनमें से दो बच्चे और कोच को ज्यादा दस्त लगने के बाद मौके पर मौजूद डॉक्टर से उपचार कराना पड़ा। वहीं मांसाहारी भोजन पसंद करने वाले बच्चों को चिकन नहीं मिला तो उन्होंने नाराजी जताई। जिस पर उनके लिए चिकन की व्यवस्था की गई। इन बच्चों का कहना था कि हमें चिकन करी, अंडा करी चाहिए। दाल, चावल और रोटी से हमारा पेट नहीं भरता।
मालूम हो कि 2 जनवरी से बायपास स्थित आशीष मंगल वाटिका में 64वीं राष्ट्रीय शालेय ताईक्वांडो प्रतियोगिता शुरू हुई है। जिसमें देश भर से करीब 600 स्कूली बच्चे भाग ले रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से आए बच्चों को उनकी पसंद का खाना खिलाना विभागीय अफसरों के लिए चुनौती बन गया है। किसी राज्य के बच्चे कम नमक मिर्च खाते हैं, तो किसी राज्य के बच्चे मिर्च मसाला खाते ही नहीं है। वहीं कुछ तीखा पसंद करते हैं। जबकि यहां पर सभी बच्चों को एक जैसा खाना खिलाया जा रहा है। असम राज्य के बच्चों का कहना था कि हम लोग मसाला नहीं खाते। यहां पर खाने में ज्यादा मसाला था। जिससे पेट खराब हो गया है। इसके बाद उनके कोच ने अफसरों से शिकायत की।

सुबह शाकाहारी, शाम को मांसाहारी भोजन :- दूसरे राज्यों के ज्यादातर बच्चे मांसाहारी खाना पसंद कर रहे हैं। इस कारण सुबह के समय सभी बच्चों को एक जैसा शाकाहारी खाना दिया जाता है। जिसमें दाल, चावल, रोटी और हरी सब्जी शामिल रहती है। वहीं शाम को विभिन्न् राज्यों के कोच की सलाह के अनुसार मांसाहारी खाना भी बनाया जा रहा है। जो 300 से ज्यादा बच्चे पसंद करते हैं। कुछ राज्यों के बच्चों का कहना था कि उन्हें मांसाहारी खाना नहीं मिलने के कारण उनका शरीर शिथिल हो रहा है। उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए खाने में चिकन करी, अंडा करी आदि चाहिए। रोटी,दाल, चावल से उनका पेट नहीं भर रहा है। बुधवार को चिकन नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। इसके बाद बुधवार की शाम को उन्हें चिकन की व्यवस्था की गई।

धर्मशाला में गर्म पानी और बाल्टी की कमी :- देश के विभिन्य राज्यों से आए खिलाडिय़ों को अलग-अलग जगह रुकने की व्यवस्था की गई है। बालिकाओं के लिए बायपास स्थित आशीष मंगल वाटिका और बालकों के लिए माधवगंज स्थित अग्रवाल धर्मशाला में रुकने की व्यवस्था की गई है। अग्रवाल धर्मशाला में करीब 300 बालकों को ठहराया गया है, लेकिन इन बच्चों को नहाने के लिए पर्याप्त गर्म पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा वहां पर बाल्टी, मग जैसे बर्तनों की भारी कमी है। जिसके चलते कई बच्चे समय पर स्नान नहीं कर पाते और समय पर प्रतियोगिता में शामिल होने नहीं पहुंच पा रहे हैं।

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