725 बेरोजगारों को बांट दिए छह करोड़, अब खोजे नहीं मिले पते-ठिकाने - .

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Saturday, 5 January 2019

725 बेरोजगारों को बांट दिए छह करोड़, अब खोजे नहीं मिले पते-ठिकाने

725 बेरोजगारों को बांट दिए छह करोड़, अब खोजे नहीं मिले पते-ठिकाने

बिना जांचे-परखे ही अंत्यावसायी विभाग ने आंख मूंदकर 10 साल में 725 लोगों को स्वरोजगार के लिए छह करोड़ से अधिक राशि बांट दी, लेकिन अब इनके नाम-पते और ठिकाने तक खोजे नहीं मिल रहे हैं। बांटी गई राशि में अभी सवा तीन करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो पाई। हाल में विभाग ने 375 लोगों को एक नहीं, दो से तीन बार नोटिस भेजने की कार्रवाई की है। इसके बावजूद लोन चुकाने के लिए आधा दर्जन से भी कम लोग सामने आए हैं। लोन एसटी-एसी वर्ग के हितग्राहियों को सबसे अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऑटो के लिए लोन बांटे गए हैं।
बकायादारों में 35 लोगों को विभाग ने डिफॉल्टर भी घोषित कर दिया। इसके नोटिस आदि भेजने के बाद भी लोन नहीं चुकाने वाले लोगों की संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विभागीय जानकारी के मुताबिक ये बांटे गए लोन अनवरत 10 सालों से चले आ रहे थे। वैसे अभी बीते दो सालों में लोन बांटने के बाद हितग्राहियों द्वारा लोन चुकाने के प्रतिशत में सुधार आया है, लेकिन इसमें में भी बिना भौतिक सत्यापन के ही लोन बांटे जाने की बात सामने आई है।

बिना फील्ड में जांचे ही कागजी खानापूर्ति :- नियम के मुताबिक छोटे-बड़े लोन लेने वाले हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति को जांचने के लिए फील्ड अफसर को भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन बिना मौके पर गए ही कागजों पर रिपोर्ट देकर हितग्राहियों को लोन के लिए एनओसी दे दी गई, क्योंकि अंत्यावसायी विभाग के पत्र पर राष्ट्रीयकृत बैंक लोन स्वीकृत करते हैं।

लगेगी शासन को करोड़ों रुपये की चपत :- हितग्राहियों द्वारा लोन नहीं चुकाने की स्थिति में बैंकों के नुकसान की भरपाई विभाग ही करवाएगा। अगर हितग्राही के पास कोई संपत्ति है तो उसकी कुर्की की जाएगी, अन्यथा हितग्राही के आवेदन में दिए पते से फरार होने की स्थिति में विभाग को ही नुकसान की भरपाई करनी होगी।

वर्षवार विभाग ने इतनी की वसूली :- विभाग बकाए की वसूली में लगभग फिसड्डी ही रहा। 2017-18 में 52 लाख रुपए की वसूली हो पाई है। वहीं 2018-19 वित्तीय वर्ष में अभी तक लगभग 55 लाख रुपये की रिकवरी की गई है। वसूली कम होने के पीछे विभाग के अनुसार फील्ड अफसर की लापरवाही है।

विभाग से इन्हें लाभ देने का प्रावधान :- अंत्योदय स्वरोजगार योजना बैंकों के माध्यम से आर्थिक विकास के कल्याणकारी योजना विशेष केन्द्रीय सहायता उप योजनांतर्गत अंत्योदय स्वरोजगार योजना का क्रियान्वयन अनुसूचित जाति के हितग्राहियों को बैंक से ऋण दिलाने के लिए किया जा रहा है। इस योजना में बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण का 50 प्रतिशत या अधिकतम रुपये 10,000 जो भी कम हो, अनुदान राशि दी जाती है।
व्यवसाय के लिए मिलता है अनुदान :- लघु उद्योग एवं व्यापार के लिए ऋण स्वीकृत कराए जाने प्रकरण भेजे जाते हैं। निगम द्वारा अनुदान प्रेषित किया जाता है। ऋण इकाई लागत की अधिकतम सीमा नहीं है। विभिन्न प्रकार की आयजनित योजनाएं यथा-किराना, मनिहारी, कपड़ा, नाई सैलून, टेलरिंग, फैंसी, मोटर मैकेनिक, साइकिल मरम्मत एवं दुकान, टीवी-रेडिया व मोबाइल रिपेयरिंग, ट्रैक्टर-ट्राली, ऑटो सहित अन्य वाहनों की खरीदी के लिए लोन दिया जाता है। कोई भी व्यापार, व्यवसाय एवं उद्योग के लिए इकाई लागत न्यूनतम राशि 50,000 रुपये का बंधन नहीं है।

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