पतंग बेचकर जीवन जीने को मजबूर है इमरान, 18 बार रह चुका है स्टेट चैंपियन - .

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Friday, 11 January 2019

पतंग बेचकर जीवन जीने को मजबूर है इमरान, 18 बार रह चुका है स्टेट चैंपियन

पतंग बेचकर जीवन जीने को मजबूर है इमरान, 18 बार रह चुका है स्टेट चैंपियन

सुबह जल्दी उठकर इमरान शेख रंगीन कागजों पर लकड़ी की स्टिक चिपकाने के काम में लग जाते हैं। इमरान इतनी तेजी से कागज और स्टिक पर अपनी उंगलियां घूमाते हैं मानो कोई करतब दिखा रहा हो। इस तरह देखते ही देखते मिनटों में इमरान खूबसूरत पतंग बना लेते हैं। लेकिन, आपको बता दें कि सिर्फ पतंग बनाने पर ही नहीं बल्कि कैरम बोर्ड पर भी इमरान की उंगलियां बहुत अच्छे से चलती है। बता दें कि, इमरान शेख कैरम बोर्ड के स्टेट प्लेयर हैं लेकिन पतंग बनाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने को मजबूर है।
इमरान के आस-पास काम करने वाले न जाने कितने ही लोग ऐसे है जो इस बात को नहीं जानते कि इमरान कैरम चैंपियन है। इमरान बताते हैं कि साल 2 000 से वे कैरम खेल रहे हैं और इस खेल के स्टेट चैंपियन बने हुए हैं। इमरान बताते हैं कि, साल 2000 के बाद से अब तक मैंने कैरम का कोई भी टूर्नामेंट नहीं हारा है। इमरान ने आगे कहा कि, मैं उंगलियों से ऐसी पतंगों का लचीलेपन देखता हूं जो मकर संक्रांति पर इस्तेमाल की जाती हैं। इमरान 18 बार कैरम के स्टेट चैंपियन रह चुके हैं इमरान बताते हैं कि, मुझे कैरम खेलना बहुत पसंद है। यह खेल मेरा जीवन है और आज भी मैं इस गेम को बड़ी ही शिद्दत के साथ खेलता हूं। यह खेल मुझे इतना पसंद है कि मैं रोजाना इसे खेलता ही हूं। पंतग बनाते वक्त भी मैं कैरम को दिमाग में रखता हूं, ताकि परफेक्ट स्टिक, रंग और डिडाइन की पतंग बना सकूं। परिवार और अपने जीवन यापन के लिए पिछले 15 सालों से मैं यही काम कर रहा हूं।

नौकरी के सवाल पर इमरान ने कहा कि, 'मैंने कई बार नौकरी के लिए कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सका। नौकरी की कोशिश करने के दौरान मुझे इस बात का अंदाजा हुआ कि पढ़ाई-लिखाई जीवन में कितनी जरूरी है।' इमरान आगे कहते हैं कि, 'काश मैं अपनी कैरम की उपलब्धियों के आधार पर कुछ काम कर पाता।' बताते चले कि, इमरान के पिता इब्राहिम शेख भी कैरम के स्टेट चैंपियन रहे हैं। इमरान अक्सर उन्हें कैरम खेलते हुए देखा करते थे। देखते ही देखते इमरान भी कैरम खेलना सीख गए और उन्हीं की तरह चैंपियन बन गए। इमरान बताते हैं कि, जब मैंने पिता से कैरम खेलने की इच्छा जाहिर की तो वे बड़े खुश हुए और मेरे कोच बन गए। मैंने उनसे खेल की बारीकियां सीखीं और कई चैंपियनशिप जीत ली। बड़ौदा जिला कैरम एसोसिएशन ने भी इमरान की प्रशंसा की है और उनकी उपलब्धियों की सराहना की है। इमरान ने एक बार राष्ट्रीय कैरम चैंपियनशिप में 6वीं रैंक हासिल की और दो बार पश्चिम क्षेत्र के फाइनल में पहुंचे।

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