स्वाइन फ्लू से आठ दिन में 14 मौत, 341 पाॅजिटिव - .

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Tuesday, 8 January 2019

स्वाइन फ्लू से आठ दिन में 14 मौत, 341 पाॅजिटिव

Swine flu in Rajasthan: स्वाइन फ्लू से आठ दिन में 14 मौत, 341 पाॅजिटिव
राजस्थान में स्वाइन फ्लू इस साल एक बार फिर कहर ढाता दिखाई दे रहा है। नए साल के पहले आठ दिन में ही स्वाइन फ्लू से 14 लोगों की मौत हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा नौ मौतें खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शहर जोधपुर मे हुई है। इसके अलावा 341 मरीज पाॅजिटिव पाए गए है। इनमें भी जयपुर के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा जोधपुर का ही है। जयपुर में 111 और जोधपुर में 99 मरीजों में स्वाइन फ्लू पाया गया है।
राजस्थान में साल 2009 में स्वाइन फ्लू का पहला आउटब्रेक हुआ था और तब से अब तक इस रोग से राजस्थान में 1220 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। इनमें से 224 लोग तो पिछले वर्ष ही मारे गए थे। नए साल की शुरुआत भी बहुत अच्छी नहीं हुई है। साल की शुरुआत से ही स्वाइन फ्लू जानलेवा साबित हो रहा है। हर रोज औसतन 50 नए मरीज सामने आ रहे है और दो मौतें हो रही है। मंगलवार को भी इस रोग के 57 नए मरीज सामने आए हैं और तीन मौतें हुई है  इस रोग पर काबू पाने के मामले में चिकित्सा विभाग की बैठकें और दावे नाकाफी साबित हो रहे है। इंतजामों का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन रोग पर नियंत्रण नही हो पा रहा है। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार हालात की समीक्षा कर चुके हैं और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा भी रोजाना समीक्षा कर रहे है, लेकिन इसका असर नजर नहीं आ रहा है। चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह संक्रामक रोग है और सर्दी का असर ज्यादा होने के कारण प्रकोप ज्यादा है। सर्दी का असर खत्म होने के बाद स्थिति सामान्य हो जएगी। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि इस रोग की कोई अलग दवाई नहीं है। ऐसे में बचाव ही एक मात्र उपाय है।
खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बचा सकती है :- जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डाॅ. रमन शर्मा कहते है कि इस रोग से बचाव के लिए खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होना जरूरी है। हालांकि इस रोग से बचाव के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है जो हर वर्ष अप्रैल या सितम्बर में लगवा लेना चाहिए, लेकिन यह वैक्सीन अभी महंगा है, इसलिए सरकारी स्तर पर बड़े पैमाने पर इसे लगाया जाना सम्भव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वायरस करीब 400 साल पुराना है और भारत में 1989 में आ गया था। इसकी प्रकृति में छोटे मोटे बदलाव होते रहते है, लेकिन समय रहते पहचान कर ली जाए तो मौजूदा दवाइयों से बचाव सम्भव है।
आयुर्वेद और घरेलू उपाय भी है कारगर :- इस रोग से बचाव में आयुर्वेद और कुछ घरेलू उपाय भी कारगर है। जयपुर में स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. सी.आर.यादव का कहना है कि इस रोग से बचाव के लिए आयुर्वेद में एक काढ़ा है। यह काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसका नियमित सेवन किया जाए तो रोग से बचा जा सकता है। इसके अलावा सर्दी में प्रतिदिन कच्ची हल्दी, आंवला, इस मौसम में आने वाले फलों और सूखे मेवों का सेवन किया जाए। प्रतिदिन आधा घंटा धूप में बैठा जाए और घर से निकलते समय नाक में तिल्ली के तेल की एक बूंद डाल ली जाए तो इस रोग से पूरी तरह बचाव सम्भव है। उन्होंने कहा कि संस्थान में यह काढ़ा उपलब्ध है।

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