किसानों को हर साल 10 हजार रुपए एकड़ के पैकेज पर विचार - .

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Saturday, 19 January 2019

किसानों को हर साल 10 हजार रुपए एकड़ के पैकेज पर विचार

किसानों को हर साल 10 हजार रुपए एकड़ के पैकेज पर विचार

किसानों के लिए संभावित वित्तीय पैकेज पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक अहम संकेत दे दिया है। इसके मुताबिक आगामी अंतरिम बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है। तेलंगाना में किसानों को दिए जा रहे पैकेज के आधार पर ही एक नए पैकेज की घोषणा का विकल्प सबसे मजबूत है।  अंतरिम बजट में हर लाभार्थी किसानों के खाते में सीधे 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष जमा कराने की मंशा सरकार जता सकती है। अगर भाजपा सत्ता में दोबारा आती है तो जुलाई, 2019 में पेश होने वाले पूर्ण बजट में इसके अमल का मसौदा पेश किया जाएगा।

वित्त मंत्री जेटली ने एक टीवी चैनल के अवार्ड पुरस्कार में यह कहा था कि किसानों को मदद की दरकार है और अगर सरकार की मंशा उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें मदद देने के लिए है तो इस भावना को बाजार भी समझेगा। वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस तरह का एलान आगामी अंतरिम बजट में भी कर सकती है क्योंकि, "इस तरह के कदम पहले भी उठाए गए हैं और अभी तक जिस तरह का प्रचलन है हम उसी दायरे में घोषणा करेंगे।"
पूरी कर्जमाफी का विकल्प खारिज :- जानकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय के भीतर और सरकार के तमाम विभागों के बीच भी किसानों को वित्तीय मदद देने के कुछ उपायों पर विमर्श किया जा रहा है। इसमें किसानों के कर्ज को पूरी तरह से माफ करने के विकल्प को एक तरह से खारिज किया जा चुका है। इसीलिए पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कई मौकों पर कांग्रेस की कर्ज माफी वादे पर जम कर हल्ला भी बोला है। सनद रहे कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी यह बोल चुके हैं कि उनकी पार्टी अगर सत्ता में आती है तो किसानों के कर्ज माफ कर देगी। इससे इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो चुका है।
बैंकों से मांगे कर्ज के आंकड़े :- जानकारों की मानें तो वित्त मंत्रालय ने सरकारी क्षेत्र के बैंकों के साथ किसानों को दिए गए कर्ज की स्थिति पर चर्चा कर ली है। बैंकों को 30 नवंबर, 2018 तक तक के सभी कृषि कर्ज के आंकड़े को तैयार रखने को कहा गया है। इसी तरह से अभी तेलंगाना की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय पैकेज लागू करने के प्रस्ताव का भी आकलन किया जा रहा है।
0.72 फीसदी बढ़ेगा राजकोषीय घाटा :-  सरकार का आकलन है कि हर छोटे व सीमांत किसान को अगर प्रति एकड़ 10 हजार रु. का पैकेज दिया जाए तो मौजूदा राजकोषीय घाटे का स्तर 0.72 फीसदी बढ़ सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे का स्तर 3.3 फीसदी तय किया था लेकिन इसके 3.5 फीसदी के करीब जाने का अनुमान है। ऐसे में अगर सरकार के राजस्व में बहुत इजाफा नहीं हुआ तो राजकोषीय घाटे में 0.72 फीसदी का इजाफा संभालना आसान नहीं होगा।
किसान मोर्चे के प्रमुख ने दिए बड़े एलान के संकेत :-  उधर भाजपा किसान मोर्चे के अध्यक्ष सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए जल्द ही "बहुत बड़े" फैसले की घोषणा करेगी। शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मस्त ने कहा कि निकट भविष्य में किसानों की समृद्धि के लिए एक बड़ा फैसला किया जाएगा। 2019 के बजट में इसका असर दिखाई देगा।

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