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Sunday, 9 December 2018

एचसीएल ने किया भारतीय आइटी सेक्टर का सबसे बड़ा सौदा

HCL: एचसीएल ने किया भारतीय आइटी सेक्टर का सबसे बड़ा सौदा

एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने शुक्रवार को कहा कि वह अमेरिकी कंपनी आइबीएम के चुनिंदा सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स का 1.8 अरब डॉलर (12,700 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा) में अधिग्रहण करेगी। यह सौदा पूरी तरह नकद भुगतान में किया जाएगा।
यह किसी भी भारतीय आइटी सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सौदा है। एक बयान में एचसीएल ने कहा कि इस सौदे को विभिन्न नियामकीय मंजूरियों की दरकार होगी। अगर सबकुछ तय समय में हुआ, तो यह सौदा अगले वर्ष जून के अंत तक पूरा हो जाएगा।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज के इस सौदे में आइबीएम के सात प्रोडक्ट हैं। ये प्रोडक्ट सेक्योरिटी, मार्केटिंग व कोलैबोरेशन सॉल्यूशंस, कॉमर्स और इस तरह के अन्य क्षेत्रों के हैं। कंपनी के मुताबिक इन उत्पादों का बाजार 50 अरब डॉलर (लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का है। निवेशकों और विश्लेषकों के सामने पेश किए एक प्रजेंटेशन में कंपनी ने कहा कि सौदे से अधिग्रहण के दूसरे वर्ष में कंपनी के राजस्व में 65 करोड़ डॉलर (4,500 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा) की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

हालांकि सौदे के बाद बदली परिस्थितियों में पहले वर्ष के राजस्व में 2.5 करोड़ डॉलर (करीब 175 करोड़ रुपये) तक की कमी आने की आशंका है। एचसीएल टेक ने कहा कि इस अधिग्रहण से उसके खाते में मार्केटिंग, कॉमर्स, सेक्योरिटी और कोलैबोरेशन क्षेत्र के कई प्रोडक्ट आ जाएंगे।
कंपनी के मुताबिक एचसीएल के इन प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग टीम जबर्दस्त है और औद्योगिक तथा भौगोलिक बाजारों में उनके बड़े ग्राहकों की तादाद 5,000 से ज्यादा है। एचसीएल टेक के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) प्रतीक अगरवाल ने कहा कि सौदे के तहत उन प्रोडक्ट्स के कर्मचारी भी अब कंपनी के खाते में आ जाएंगे।

हालांकि उन्होंने ऐसे कर्मचारियों की संख्या नहीं बताई। वहीं, कंपनी के प्रेसिडेंट और सीईओ सी विजयकुमार ने कहा कि जिन प्रोडक्ट्स का अधिग्रहण हम कर रहे हैं, वे एचसीएल के लिए रणनीतिक महत्व के हैं। आइबीएम के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जॉन केली ने कहा कि कंपनी के लिए इन प्रोडक्ट्स की बिक्री कर लेने का यह बेहद उचित समय है।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने कहा कि सौदे के तहत अधिकांश रकम अंदरुनी स्रोतों से जुटाई जाएगी। इसके साथ ही लगभग 30 करोड़ डॉलर (करीब 2,100 करोड़ रुपये) का कर्ज लिया जाएगा। डील की कागजी कार्रवाई खत्म होने के साथ ही आधा भुगतान कर दिया जाएगा।

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