जेटली का ऐलान, अगले कुछ महीनों में सरकारी बैंकों को मिलेंगे 83,000 करोड़ रुपये-चमकेंगे बैंकिंग शेयर - .

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Thursday, 20 December 2018

जेटली का ऐलान, अगले कुछ महीनों में सरकारी बैंकों को मिलेंगे 83,000 करोड़ रुपये-चमकेंगे बैंकिंग शेयर

जेटली का ऐलान, अगले कुछ महीनों में सरकारी बैंकों को मिलेंगे 83,000 करोड़ रुपये-चमकेंगे बैंकिंग शेयर

चालू वित्त वर्ष के बचे हुए करीब साढ़े तीन महीनों के दौरान केंद्र सरकार कमजोर सरकारी बैंकों में 83,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी। बैंकों को दी जाने वाली मदद की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे सरकारी बैंकों के कर्ज देने की क्षमता में इजाफा होगा और उन्हें आरबीआई के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) से बाहर आने में मदद मिलेगी।
इस मदद के बाद इस वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों को दी जाने वाली पूंजी 65,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.06 लाख करोड़ हो जाएगी। सरकार ने गुरुवार को संसद से 85,948 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की मंजूरी मांगी है, जिसमें चालू वित्त वर्ष के दौरान कमजोर सरकारी बैंकों के पूंजीकरण के लिए दी जाने वाली 41,000 करोड़ रुपये की रकम शामिल है। जेटली ने कहा कि बैंकों के एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) को पहचानने का काम पूरा हो चुका है और इसमें कमी आनी शुरू हो गई है।
बैंकों के कमजोर बैलेंस शीट और पर्याप्त पूंजी नहीं होने की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 23 सरकारी बैंकों में से 11 को पीसीए में डाल रखा है, जिसकी वजह से उनके नए ब्रांच खोलने और कर्ज देने पर रोक लगी हुई है। पीसीए को लेकर सरकार और आरबीआई के बीच तनातनी रही है। गौरतलब है कि 2017 में सरकार ने बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये दिए जाने की घोषणा की थी। सरकार की तरफ से दी जाने वाली पूंजीगत सहायता 20 सरकारी बैंकों को मार्च 2019 तक दी जानी है ताकि वह वैश्विक मानकों के मुताबिक नियामकीय पूंजी के स्तर को पूरा कर सकें। इसमें से 58,000 करोड़ रुपये की राशि बैंकों को वित्तीय बाजार से जुटानी थी, लेकिन बैंक ऐसा करने में नाकाम रहे हैं। इसलिए सरकार को अतिरिक्त रकम जुटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
सरकार की इस राहत से बैंकिंग शेयर चमक सकते हैं। सरकार की तरफ से दी गई राहत बाजार बंद होने के बाद आई। बैंकों के बढ़ते एनपीए की वजह से आरबीआई ने 23 में से 11 सरकारी बैंकों को पीसीए में डालते हुए उनके कर्ज देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार की इस राहत से इन बैंकों को पर्याप्त पूंजी मिलेगी, जिसकी वजह से उनका बैलेंस शीट मजबूत होगा। सितंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक सभी व्यावसायिक बैंकों का एनपीए 10.36 लाख करोड़ रुपये से कम होकर 10.14 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। इसमें सरकारी बैंकों के एनपीए की हिस्सेदारी 85.9 फीसद रही है। बीएसई का बैंकिंग इंडेक्स करीब 100 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में देखने को मिला।

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