तनाव से परेशान तो किराये पर कुत्ता पालें सरकार - .

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Saturday, 10 November 2018

तनाव से परेशान तो किराये पर कुत्ता पालें सरकार

तनाव से परेशान तो किराये पर कुत्ता पालें सरकार

तनाव दूर करने के लिए कुत्‍ते :- जयपुर के श्‍वान व्‍यवहार विशेषज्ञ वीरेन शर्मा देश भर के मेट्रो शहरों में करीब 100 मैड (मैड अबाउट डॉग्‍स) केंद्र खेलने की योजना बना रहे हैं। यहां बेहतरीन नस्‍ल के कुत्‍तों के अलावा अन्‍य सुविधाएं भी मौजूद होंगी, जिनमें सैलून, स्‍पा, होटल, ट्रेनिंग इंस्‍टीट्यूट, मेडिकल सुविधाएं और व्‍यवहार सुधार इंस्‍टीट्यूट शामिल होंगे। शर्मा ने न्‍यूज एजेंसी प्रेट्र से बताया कि दिल्‍ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे शहरों में डॉग-डे-आउट की सुविधा भी मिलेगी। इनमें से कुछ सुविधाएं गुलाबी शहर जयपुर में पहले से ही मौजूद हैं। शर्मा ने बताया कि साल के अंत में देश के बड़े मेट्रो शहरों में कुत्‍तों की रेंट फैसिलिटी शुरू करेंगे।
किराए पर कुत्‍ते लेते हैं विदेशी :- यह कांसेप्‍ट पश्चिमी देशों में खूब प्रचलित है। लोग अपने काम का तनाव दूर करने के लिए किराए पर कुत्‍ते लेते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं। इन दिनों बिजी लाइफ शेड्यूल में डॉग लवर्स खुद कुत्‍ता पाल कर उनकी देखभाल नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोगों का स्‍वास्‍थ्‍य और जीवन पर असर पड़ता है। ऐसे लोगों के लिए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित कुत्‍ते किराए पर मिलेंगे। शर्मा ने बताया कि यहां प्रशिक्षित कुत्‍ते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। ये आउटलेट रिटेल चेन होंगे, एक ही छत के नीचे कुत्‍तों से संबंधित सभी चीजें मौजूद होंगी। यहां से आप कुत्‍ते खरीद-बेच सकेंगे। किराए पर ले सकेंगे। यहां उनकी देखभाल की सुविधा भी मौजूद होगी। शहर के बाहर जा रहे लोग अपने कुत्‍तों को यहां देखभाल के लिए छोड़ सकेंगे।
एक्‍सपर्ट करेंगे कुत्‍तों की ट्रेनिंग और केयर :- शर्मा ने बताया कि जयपुर में अपनी तरह का पहला कैनाइन बिहेवियरल इंस्‍टीट्यूट अक्‍टूबर में खुल गया है। यह संस्‍थान विदेशों से आए एक्‍सपर्ट लोगों की देखरेख में तैयार किया जाएगा, जो कुत्‍तों को खास तौर पर प्रशिक्षित और केयर करेंगे। इसका नाम इंटरनेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ कैनाइन मैनेजमेंट (आईआईसीएम) होगा। यहां प्रोफेशनल जानकारी देकर डॉग एक्‍सपर्ट तैयार किए जाएंगे। शर्मा ने कहा कि यहां कुत्‍ते कभी अध्‍ययन का हिस्‍सा नहीं रहे हैं लेकिन अब होंगे। यह संस्‍थान कुत्‍तों की देखभाल, उनके व्‍यवहार, उनके प्रशिक्षण और नस्‍ल के लिए खास तौर पर जाना जाएगा। यहां लोगों को कुत्‍तों के जन्‍म से लेकर उनकी मृत्‍यु तक सबकुछ पढ़ाया और सिखाया जाएगा।

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