MP सरकार ने पांच सूचना आयुक्त नियुक्त करने के लिए राजभवन से की अनुशंसा - .

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Tuesday, 2 October 2018

MP सरकार ने पांच सूचना आयुक्त नियुक्त करने के लिए राजभवन से की अनुशंसा

MP सरकार ने पांच सूचना आयुक्त नियुक्त करने के लिए राजभवन से की अनुशंसा

राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से रिक्त सूचना आयुक्त के पदों को भरने का आखिरकार सरकार ने निर्णय ले ही लिया। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की असहमति के बावजूद सरकार ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से पांच सूचना आयुक्त नियुक्त करने की अनुशंसा की है। इसमें सेवानिवृत्त आईपीएस अफसर सुरेंद्र सिंह, पूर्व आईएएस अरुण पांडे, आरके माथुर और डीपी अहिरवार के साथ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी के नाम शामिल हैं। उधर, सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अजय दुबे ने नियुक्तियों पर आपत्ति जताते हुए राज्यपाल से शपथ न कराने की मांग करते हुए कहा कि वे इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और दस सूचना आयुक्त के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां कभी भी पांच सूचना आयुक्त से ज्यादा नहीं रहे। अभी आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त केडी खान और दो सूचना आयुक्त सुखराज सिंह व आत्मदीप हैं। खाली पदों को भरने की कोशिश बीते एक साल से चल रही थी, लेकिन किसी न किसी वजह से मामला अटक रहा था। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने चुनाव के समय को देखते हुए बैठक नई सरकार के गठन के बाद करने की मांग उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इसमें यह भी कहा गया था कि आपत्ति के बावजूद यदि बैठक करके निर्णय लिया जाता है तो उसमें असहमति रहेगी।
इसके बाद भी सोमवार को चयन समिति की बैठक बुलाई गई और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच प्रारंभिक चर्चा हुई। मंगलवार को सुबह सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। इनके साथ आवेदनों का बैग था। बताया जा रहा है कि सूचना आयुक्त के नामों पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद मंगलवार को औपचारिकता पूरी की गई।मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने चार सेवानिवृत्त अधिकारियों के साथ एक पत्रकार का नाम तय होने की पुष्टि की।
हटाने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश से करवानी पड़ेगी जांच :- सूचना का अधिकार कानून के तहत सूचना आयुक्तों का कार्यकाल पांच साल और अधिकतम आयु 65 साल रखी गई है। एक बार नियुक्ति होने के बाद यदि किसी सूचना आयुक्त के खिलाफ कोई गंभीर शिकायत आती है तो सरकार राज्यपाल से जांच कराने की सिफारिश कर सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराई जा सकती है। इसमें यदि आपत्ति प्रमाणित पाई जाती है तो सूचना आयुक्त को हटाया जा सकता है।

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