अटलजी की भतीजी ने बढ़ाया रोमांच, जानिए राजनांदगांव की सियासी तासीर - .

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Tuesday, 23 October 2018

अटलजी की भतीजी ने बढ़ाया रोमांच, जानिए राजनांदगांव की सियासी तासीर

अटलजी की भतीजी ने बढ़ाया रोमांच, जानिए राजनांदगांव की सियासी तासीर

कांग्रेस ने जैसे ही छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव सीट से अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला की उम्मीदवारी का ऐलान किया, स्प्ष्ट हो गया कि पिछले दो चुनावों की तरह इस बार मुकाबला एकतरफा नहीं होगा। 31 साल भाजपा में रहने के बाद कांग्रेस का दामन थामने वालीं करुणा शुक्ला का मुकाबला 15 साल से मुख्यमंत्री कमान संभाल रहे रमन सिंह से है।
रमन सिंह और करुणा शुक्ला के अलावा यहां के तीसरे दावेदार दीपक यादव हैं, जिन्हें अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) ने टिकट दिया है। दीपक पार्षद हैं। पहले खबर थी कि अजीत जोगी खुद यहां से लड़ेंगे लेकिन बाद में विचार पलट गया। दीपक ने आखिरी दिन नामांकन दाखिल किया।
2013 विधानसभा चुनाव: पिछले विधानसभा चुनाव में रमन सिंह ने 35,866 मतों से जीत दर्ज की थी। उन्हें जहां 58.45 फीसदी यानी 86,797 वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर पर रहीं कांग्रेस प्रत्याशी अलका उदय मुदलियार को 34.30 फीसदी यानी 50,931 से संतोष करना पड़ा था। तब इस सीट पर कुल 14 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी, जिनमें से ज्यादातर की जमानत जब्त हो गई थी। चौथे नंबर पर नोटा रहा था, जिसके लिए 2042 लोगों ने बटन दबाया था। कुल 82.36 फीसदी मतदान हुआ था।
2008 विधानसभा चुनाव: 2008 में भी यहां से रमन सिंह जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के उदय मुदलियार को 32,389 मतों से हराया था। रमन सिंह को 77,230 वोट (59.37%) मिले थे, वहीं उदय मुदलियार के खाते में 44,841 मत (34.47%) पड़े थे। कुल 14 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे और 78.69 फीसदी मतदान हुआ था।
2003 विधानसभा चुनाव: मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद हुए पहले चुनाव में यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ। कांग्रेस के उदय मुदलियार महज 40 मतों से जीत दर्ज कर सके। उन्हें 43,081 वोट मिले, जबकि भाजपा के खाते में लीलाराम भोजवानी को 43,041 मत गए। दोनों के वोट प्रतिशत में महज 0.05 फीसदी का अंतर रहा। कुल 76.63 फीसदी मतदान हुआ था।

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